Bokaro News : टेटुलिया मौजा में स्थित 74 एकड़ से अधिक जमीन को लेकर चल रहे बहुचर्चित विवाद में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में यह जमीन वन भूमि साबित हुई है, जिसे उमायुश मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा खरीदा गया था। मामले में आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में हेरफेर कर संरक्षित वन भूमि की खरीद-बिक्री की गई।प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीआईडी इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन को पुराने परती या गैर वन भूमि के रूप में दिखाकर निजी कंपनी को हस्तांतरित किया गया था, जबकि वन विभाग लगातार दावा करता रहा है कि यह संरक्षित वन क्षेत्र है।
फर्जी कागजात और अधिकारियों की मिलीभगत की जांच तेज
जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। 1933 की कथित नीलामी से जुड़े दस्तावेजों को आधार बनाकर जमीन का स्वामित्व दिखाया गया, लेकिन कई रिकॉर्ड आधिकारिक दस्तावेजों में नहीं मिले।
एजेंसियों को आशंका है कि इस पूरे खेल में भू-माफिया, बिचौलियों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत रही है। मामले में पहले भी कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और करोड़ों रुपये के लेन-देन की जांच की जा रही है।
ईडी और सीआईडी की कार्रवाई से बढ़ी हलचल
मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने झारखंड और बिहार के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। बोकारो वन विभाग, रजिस्ट्रार कार्यालय और कई निजी कंपनियों के दफ्तरों की भी जांच की गई। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि वन भूमि को किस तरह रिकॉर्ड में बदलकर निजी हाथों में सौंपा गया।
इस मामले ने राज्य में जमीन घोटालों और सरकारी रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।