Jamshedpur: जमशेदपुर स्थित अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीति कुमार की अदालत ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस मामले में आरोपी सौरभ मंडल के खिलाफ 29 जून 2024 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद पूरे मामले की सुनवाई अदालत में चली। विचारण के दौरान न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपने लगाए गए आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध नहीं कर सका, जिसके कारण अदालत ने मामले को गंभीरता से परखते हुए अंतिम निर्णय दिया।
बयानों में विरोधाभास बना फैसला का आधार
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि अभियोजन पक्ष के बयान आपस में मेल नहीं खा रहे थे और उनमें कई महत्वपूर्ण विरोधाभास मौजूद थे। खासकर घटनास्थल को लेकर अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग जानकारी दी गई थी। प्रारंभिक शिकायत, जो एसएसपी और महिला थाना में दी गई थी, उसमें घटनास्थल गोविंदपुर, राजनगर बताया गया था, जबकि दर्ज एफआईआर में बागबेड़ा का उल्लेख किया गया। इस प्रकार के विरोधाभासी तथ्यों ने मामले को और कमजोर कर दिया और न्यायालय के सामने संदेह की स्थिति उत्पन्न कर दी।
आयु और परिस्थितियों ने भी खड़े किए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सूचक और पीड़िता की उम्र 19 वर्ष थी, जबकि आरोपी की उम्र 18 वर्ष पाई गई। इन तथ्यों ने मामले की परिस्थितियों को और अधिक जटिल बना दिया, जिससे पूरे घटनाक्रम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया। अदालत ने इन पहलुओं को भी गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले का मूल्यांकन किया।
साक्ष्य के अभाव में आरोपी को मिली राहत
सभी तथ्यों और प्रस्तुत साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी सौरभ मंडल को बरी करने का आदेश पारित किया। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता स्वाति मित्रा ने प्रभावी ढंग से पैरवी की, जिसके बाद अदालत ने अंतिम निर्णय सुनाया।