Jharkhand News: झारखंड सचिवालय सेवा संवर्ग के लिए महत्वपूर्ण कैडर रिव्यू कमेटी (Cadre Review Committee) की बैठक पांच मई को आयोजित होनी थी, लेकिन कार्मिक विभाग की कार्यशैली के कारण यह नहीं हो सकी. सचिवालय सेवा संघ के पदाधिकारियों को कमेटी में सदस्य के रूप में शामिल करने का आदेश तो 30 अप्रैल 2026 को ही जारी हो गया था, परंतु उन्हें इसकी जानकारी पांच मई को बैठक शुरू होने से मात्र दो घंटे पहले दी गई. इस देरी की वजह से संघ के पदाधिकारी बैठक में शामिल नहीं हुए और चर्चा टल गई.
पदों के सृजन को लेकर सचिवालय संघ का आंदोलन
राज्य में सचिवालय सेवा संवर्ग के अधिकारियों के लिए उच्च पदों के सृजन और व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इस कमेटी का गठन किया गया था. वर्तमान में उपसचिव के 54 और संयुक्त सचिव के 23 पद स्वीकृत हैं, जबकि संघ द्वारा उपसचिव के 41 और संयुक्त सचिव के 24 अतिरिक्त पदों की मांग की जा रही है. शुरुआत में कमेटी में संघ के प्रतिनिधियों को जगह नहीं दी गई थी, जिसके विरोध में 28 अप्रैल को कैबिनेट बैठक से पहले सचिवालय में मानव श्रृंखला बनाकर आंदोलन शुरू किया गया था.
मंत्रियों के साथ वार्ता के बाद बनी थी सहमति
आंदोलन के बाद नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार और स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के साथ संघ के पदाधिकारियों की सकारात्मक वार्ता हुई. इस बातचीत में संघ के अध्यक्ष रितेश कुमार और महासचिव राजेश कुमार को कैडर रिव्यू कमेटी में बतौर सदस्य शामिल करने पर सहमति बनी. मंत्रियों के फैसले के आलोक में ही कार्मिक विभाग ने 30 अप्रैल को आदेश जारी किया था, लेकिन सूचना के संप्रेषण में हुई देरी ने फिर से गतिरोध पैदा कर दिया है.
कार्मिक सचिव को ज्ञापन सौंपकर मांगी जानकारी
बैठक में शामिल न होने के साथ ही संघ के पदाधिकारियों ने कार्मिक सचिव को एक ज्ञापन भी सौंपा है. इसमें उन्होंने Terms Of Reference (TOR) में किए गए सुधारों और अन्य संबंधित मुद्दों पर विस्तृत जानकारी मांगी है. संघ का कहना है कि सूचना समय पर न मिलने और अन्य तकनीकी कारणों से वे बैठक का हिस्सा नहीं बन सके. अब सचिवालय सेवा संवर्ग के भविष्य से जुड़े इस कैडर रिव्यू पर सबकी निगाहें अगली बैठक की तारीख पर टिकी हैं.