Jharkhand: लोहरदगा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की मुस्तैदी से एक बड़ी घटना टल गई, जब प्लेटफॉर्म संख्या 1 पर तीन नाबालिग बच्चे संदिग्ध अवस्था में बैठे हुए पाए गए। यह कार्रवाई 26 अप्रैल को मंडल सुरक्षा आयुक्त पवन कुमार के निर्देश पर की गई। जांच के दौरान आरपीएफ टीम की नजर इन बच्चों पर पड़ी, जो एक बेंच पर चुपचाप बैठे हुए थे। पूछताछ करने पर बच्चों ने अपनी पहचान अमीश मुंडा (11 वर्ष), संतोष बिलोर (10 वर्ष) और रमेश बिलोर (10 वर्ष) के रूप में बताई, जो रांची के मैक्लुस्कीगंज क्षेत्र के रहने वाले हैं।
घर से बिना बताए भागकर पहुंचे थे लोहरदगा
बातचीत के दौरान बच्चों ने स्वीकार किया कि वे बिना अपने परिजनों को जानकारी दिए घर से निकल गए थे और भटकते हुए लोहरदगा रेलवे स्टेशन तक पहुंच गए। बच्चों की स्थिति को देखते हुए आरपीएफ ने तत्काल मामले को गंभीरता से लिया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की, ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से उनके परिवार या संबंधित एजेंसी तक पहुंचाया जा सके।
चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपे गए बच्चे
घटना की सूचना मिलते ही चाइल्ड हेल्पलाइन लोहरदगा को तुरंत जानकारी दी गई, जिसके बाद केस वर्कर मो इस्तखार आलम और सुनीमा कुमारी मौके पर पहुंचे। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों बच्चों को सुरक्षित रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन टीम के हवाले कर दिया गया। इस पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक एल.के. मिश्रा के साथ आरपीएफ स्टाफ एसआर इंदवार, बिनोद गोपे और आजाद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनकी सतर्कता से बच्चों को समय रहते सुरक्षित किया जा सका।