Seraikela: चांडिल प्रखंड के आसनबनी पंचायत अंतर्गत जामडीह गांव में दलमा बुरू सेंदरा देशुआ समिति की ओर से सेंदरा पर्व पूरे पारंपरिक विधि-विधान, श्रद्धा और आस्था के माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर गांव का वातावरण पूरी तरह से पारंपरिक रंग में रंगा नजर आया, जहां सुबह से ही ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम की शुरुआत लाया देवेन कर्मकार द्वारा ईष्ट देवता की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की गई, जिसके बाद पूरे आयोजन में धार्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार हो गया। ढोल-नगाड़ों और मांदर की गूंज के बीच ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ पूजा में शामिल हुए, जिससे आयोजन का माहौल और भी जीवंत और उत्साहपूर्ण बन गया।
“सेंदरा हमारी पहचान और विरासत का प्रतीक”
कार्यक्रम के दौरान समिति के सचिव सत्य नारायण मुर्मू ने सेंदरा पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, अस्मिता और सदियों पुरानी विरासत का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आधुनिक समय में हमारी पारंपरिक संस्कृति धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है, ऐसे में सेंदरा जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी परंपराओं और संस्कृति की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने समाज के युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे आगे बढ़कर अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
परंपरा अनुसार दलमा जंगल में होगा प्रवेश
समिति के अनुसार सेंदरा पर्व की परंपरा के तहत आज रात्रि सेंदरा वीर दलमा जंगल में प्रवेश करेंगे, जहां वे नियम-कायदों का पालन करते हुए बुरू बोंगा की पूजा करेंगे और सुबह वापस लौटेंगे। समिति ने स्पष्ट किया कि यह आयोजन किसी प्रकार का शिकार नहीं, बल्कि प्रकृति की पूजा और पूर्वजों को स्मरण करने का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक पर्व है, जो समाज की आस्था और परंपरा को दर्शाता है।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता
इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष फकीर चंद्र सोरेन, उपाध्यक्ष गुरु चरण सिंह, रामगढ़ ग्राम प्रधान कालीपोद सिंह, गणपति सिंह, फागू सोरेन, सत्य रंजन सोरेन, बृंदाबन सिंह, बलाई टुडू, सोम मांझी, सदानंद सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए, जिससे पूरे आयोजन में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का अनूठा दृश्य देखने को मिला।