Jharkhand News: झारखंड के पथ निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग में कार्यरत चार सहायक अभियंताओं के लिए यह खबर उनके करियर की सबसे बड़ी राहत बनकर आई है. राज्य सरकार ने एक विशेष अधिसूचना के जरिए इन्हें विभागीय और व्यावसायिक परीक्षाएं पास करने की अनिवार्य शर्त से हमेशा के लिए मुक्त कर दिया है. यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि उन अधिकारियों के प्रति सम्मान है जिन्होंने अपने जीवन के कई दशक राज्य की बुनियादी संरचना को गढ़ने में लगा दिए, लेकिन तकनीकी परीक्षाओं के पेंच के कारण उनकी पदोन्नति रुकी हुई थी.
नियमों की मर्यादा और अनुभव को प्राथमिकता
सरकार का यह निर्णय 15 मई 1992 के उस पुराने प्रावधान पर आधारित है, जो एक निश्चित आयु और लंबी सेवा अवधि पूरी कर चुके कर्मियों को विभागीय परीक्षाओं से छूट देने की वकालत करता है. अखिलेश प्रसाद सिंह, राज कुमार मंडल, चंद्रशेखर सिंह और उमेशवर राम जैसे वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह आदेश संजीवनी की तरह है. अब ये अधिकारी बिना किसी तकनीकी अड़चन के अपने हक की पदोन्नति और सेवा लाभ प्राप्त कर सकेंगे. अधिसूचना जारी होते ही यह बदलाव प्रभावी हो गया है.
अवरोध खत्म, अब सम्मान के साथ आगे बढ़ेंगे कदम
अक्सर सरकारी तंत्र में नियम इतने जटिल हो जाते हैं कि अनुभव पर किताबी परीक्षाएं भारी पड़ने लगती हैं. लोहरदगा, दुमका, पाकुड़ और चक्रधरपुर जैसे क्षेत्रों में तैनात इन इंजीनियरों के लिए यह छूट उनके करियर के अंतिम पड़ाव में एक सुखद सम्मान की तरह है. सरकार ने यह स्वीकार किया है कि दशकों का मैदानी अनुभव किसी भी विभागीय परीक्षा से कहीं अधिक मूल्यवान है. इस निर्णय से न केवल इन चार अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि विभाग में वरिष्ठता के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी गया है.