Political Breaking: आम आदमी पार्टी (आप) को अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी के दिग्गज चेहरे और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने दो अन्य सांसदों, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ इस्तीफा दे दिया है. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चड्ढा ने अपनी ही पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, मैं सही आदमी था, लेकिन गलत पार्टी में था. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर उनकी आवाज दबाई जा रही थी. इसके साथ ही इन नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व की जमकर सराहना की है, जिससे इनके भाजपा में शामिल होने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं.
संदीप पाठक का छलका दर्द: पार्टी के लिए सब कुछ झोंक दिया
पार्टी के रणनीतिकार माने जाने वाले संदीप पाठक ने भारी मन से इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 10 वर्षों में दिन-रात एक कर पार्टी को सींचा था. पाठक ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कभी खुद को आगे नहीं रखा और हमेशा अरविंद केजरीवाल के विजन को सर्वोपरि माना. उन्होंने अपनी निष्ठा का प्रमाण देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके काम की गवाही “आप” के नेता खुद देंगे. पाठक के अनुसार, पार्टी के वर्तमान हालात ऐसे बन गए कि उन्हें अपने रास्ते अलग करने पर मजबूर होना पड़ा.
दो-तिहाई सांसदों की टूट से संकट में केजरीवाल
यह बगावत आम आदमी पार्टी के लिए महज एक इस्तीफा नहीं, बल्कि संसदीय दल में बड़ी टूट है. सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा के साथ दो-तिहाई सांसदों का यह समूह भाजपा का दामन थाम सकता है. अगर ऐसा होता है, तो राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर हो जाएगी. नेताओं का कहना है कि पार्टी की कार्यशैली और आंतरिक लोकतंत्र में आई गिरावट के कारण वे अब इस ढांचे में काम करने में असमर्थ महसूस कर रहे थे.
भाजपा की सराहना और भविष्य के संकेत
इस्तीफा देने वाले सांसदों ने जिस तरह से केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व की तारीफ की है, उससे साफ है कि दिल्ली और पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने वाले हैं. राघव चड्ढा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह अब उस नेतृत्व के साथ काम करना चाहते हैं जो देश को मजबूती दे रहा है. “आप” के लिए यह समय आत्ममंथन का है, क्योंकि उसके सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों ने ही अब उसके सिद्धांतों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.