Adityapur News: जमशेदपुर और आदित्यपुर को जोड़ने वाले खरकई ब्रिज पर मंगलवार को नगर निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान एक मजाक बनकर रह गया. सुबह बड़े लाव-लश्कर के साथ पहुंचे निगम कर्मियों ने ठेले हटाए और सड़क साफ कराई, लेकिन सूरज ढलते ही स्थिति जस की तस हो गई. बिष्टुपुर से आदित्यपुर आने वाली लेन में शाम होते ही फिर से ठेले सज गए और पूरा ट्रैफिक रेंगने लगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की यह कार्रवाई सिर्फ कागजों और मीडिया की सुर्खियों तक ही सीमित है, जमीनी हकीकत आज भी जाम और गंदगी से भरी है.
सुबह हटाओ, शाम को लगाओ बना नया सिस्टम
ब्रिज से गुजरने वाले राहगीरों में भारी नाराजगी है. लोगों का आरोप है कि “सुबह हटाओ, शाम को फिर लगाओ” अब यहां का अघोषित नियम बन चुका है. निगम अधिकारी रवि भारती के नेतृत्व में टीम ने निरीक्षण तो किया और इसे ट्रैफिक सुधार व पर्यावरण बचाने की कवायद बताया, लेकिन शाम की तस्वीर ने दावों की पोल खोल दी. ब्रिज पर लगने वाले इन ठेलों से न केवल जाम लग रहा है, बल्कि खरकई नदी में गिरता कचरा भी पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन गया है. अधिकारियों की चेतावनी का इन अतिक्रमणकारियों पर कोई असर होता नहीं दिख रहा.
जुर्माने और FIR की चेतावनी महज कागजी शेर
नगर निगम ने दोबारा अतिक्रमण करने वालों पर भारी जुर्माना और FIR दर्ज करने की सख्त चेतावनी दी है. हालांकि, धरातल पर निगरानी की भारी कमी है. स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या यह सब प्रशासन, आदित्यपुर नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की मौन सहमति से हो रहा है? लोगों का मानना है कि जब तक पुलिस की स्थायी तैनाती नहीं होगी और सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के जरिए निगरानी नहीं की जाएगी, तब तक ऐसे अभियान सिर्फ खानापूर्ति ही साबित होंगे.
समाधान के बिना अधूरा है हर अभियान
अतिक्रमण की इस समस्या का एक बड़ा पहलू ठेले लगाने वालों की आजीविका भी है. बुद्धिजीवियों का कहना है कि जब तक वेंडिंग जोन बनाकर इन दुकानदारों को वैकल्पिक जगह नहीं दी जाएगी, तब तक वे बार-बार ब्रिज पर ही लौटेंगे. फिलहाल, प्रशासन की ढुलमुल कार्यशैली के कारण हजारों लोग रोजाना जाम में अपना कीमती समय और ईंधन बर्बाद करने को मजबूर हैं. अब देखना यह है कि क्या प्रशासन कोई ठोस और स्थायी कदम उठाता है या खरकई ब्रिज इसी तरह अतिक्रमण के बोझ तले कराहता रहेगा.