Jamshedpur: महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। इसी कड़ी में तिलक पुस्तकालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मेयर सुधा गुप्ता ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर महिलाओं को गुमराह किया जा रहा है और जिस कानून को सशक्तिकरण का प्रतीक बताया गया, उसे ऐसी शर्तों में बांध दिया गया है कि उसका लागू होना वर्षों तक टल सकता है।
“यह अधिकार नहीं, राजनीतिक धोखा”
मेयर सुधा गुप्ता ने साफ शब्दों में कहा कि यह महिला अधिकार नहीं, बल्कि महिला आरक्षण के नाम पर एक राजनीतिक धोखा है। उनका आरोप था कि अगर सरकार की नीयत साफ होती, तो यह कानून तुरंत लागू किया जा सकता था, लेकिन इसे जानबूझकर जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ दिया गया है, जिससे इसे टालने का रास्ता तैयार हो गया है।
कानून बना, लेकिन लागू नहीं
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान पारित किया गया, लेकिन इसे तत्काल लागू नहीं किया गया। इसके बजाय इसे आगे की प्रक्रियाओं से जोड़ दिया गया, जिससे इसका क्रियान्वयन अनिश्चित समय के लिए टल गया है।
जनगणना और परिसीमन की शर्त बनी बाधा
मेयर ने कहा कि इस कानून के तहत आरक्षण लागू करने से पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी किया गया है। वर्तमान स्थिति में नई जनगणना ही नहीं हुई है, ऐसे में महिला आरक्षण अपने आप आगे खिसक गया है। उनका कहना था कि यह शर्तें ही असली बाधा बन गई हैं।
2029 या उससे आगे तक टलने की आशंका
सुधा गुप्ता ने आशंका जताई कि मौजूदा हालात को देखते हुए महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद ही लागू हो सकता है। यानी महिलाओं को अधिकार देने के नाम पर कम से कम 5 से 6 साल का इंतजार और करना पड़ेगा, जो अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
विपक्ष की मांग को किया नजरअंदाज
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष ने मौजूदा सीटों पर ही तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इस पर कोई सहमति नहीं दिखाई। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है।
परिसीमन से बदलेगा राजनीतिक संतुलन
मेयर ने कहा कि परिसीमन के बाद सीटों की संख्या और सीमाएं बदलेंगी, जिससे कई राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसको लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं, लेकिन सरकार इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है।
सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
सुधा गुप्ता ने कहा कि अगर सरकार सच में महिलाओं को अधिकार देना चाहती, तो यह आरक्षण आज से ही लागू हो सकता था। लेकिन इसे प्रक्रियाओं के जाल में फंसाकर जानबूझकर लटकाया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून महिलाओं को अधिकार देने का नहीं, बल्कि उन्हें इंतजार कराने का प्रतीक बन गया है।
स्पष्ट मांगें और आंदोलन की चेतावनी
मेयर ने अपनी मांग रखते हुए कहा कि महिला आरक्षण को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू किया जाए। जनगणना और परिसीमन के बहाने इसे टालना बंद किया जाए और 33 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के प्रावधान के साथ इसे लागू किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो महिलाएं सड़क से सदन तक आंदोलन करने को मजबूर होंगी।