Ranchi: राजधानी रांची के कांग्रेस भवन में रविवार को राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर केंद्र की भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर जोरदार हमला बोला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने एक स्वर में आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर केंद्र सरकार असल में परिसीमन की एक राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ा रही थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने समय रहते विफल कर दिया। नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार की मंशा साफ नहीं है और इसे लेकर जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही थी।
‘नियत में खोट, आरक्षण के नाम पर राजनीति’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने प्रेस वार्ता के दौरान सीधे प्रधानमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी, जबकि महिला आरक्षण को केवल एक ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना चाहती है, तो 2029 के चुनाव में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करे, कांग्रेस बिना शर्त इसका समर्थन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं को नेतृत्व देने का रहा है और पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में भी पार्टी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
परिसीमन के पीछे ‘गणित’ और विपक्ष की रणनीति
विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इस पूरे मुद्दे को केंद्र सरकार की एक सोची-समझी राजनीतिक चाल करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार जनगणना कराने से इसलिए बच रही है क्योंकि इससे एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों की वास्तविक संख्या सामने आ जाएगी, जिससे आरक्षण का दबाव बढ़ सकता है। इसी दबाव से बचने के लिए जल्दबाजी में यह प्रस्ताव लाया गया, लेकिन विपक्षी गठबंधन ने इसे समझते हुए समय रहते इसका विरोध किया और इसे सफल नहीं होने दिया।
‘महिला आरक्षण नहीं, चुनावी एजेंडा’
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ होती तो 2024 के चुनाव में ही आरक्षण लागू किया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में यह पहली बार है जब सरकार को संसद में इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, अब देश की जनता केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं होगी, बल्कि ठोस कार्रवाई और जवाबदेही चाहती है।
महिला कांग्रेस का आंदोलन तेज करने का ऐलान
प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब यह लड़ाई सड़कों तक जाएगी। उन्होंने ऐलान किया कि महिला कांग्रेस राज्य के सभी जिलों में जाकर महिलाओं के बीच इस मुद्दे को उठाएगी और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर जागरूकता फैलाएगी। उनका कहना था कि महिलाओं के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
इस प्रेस वार्ता के बाद यह साफ हो गया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में झारखंड समेत पूरे देश की राजनीति में एक बड़ा विषय बनने वाला है, जिस पर सियासी बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।