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  • 2026-04-17

Jharkhand News: झारखंड ब्यूरोक्रेसी में "रिटायरमेंट का पतझड़", 8 महीनों में विदा होंगे 8 IAS; 43 अफसरों की कमी से चरमरा सकती है प्रशासनिक व्यवस्था

Jharkhand News: झारखंड में आईएएस अधिकारियों की कमी का संकट गहराता जा रहा है. राज्य में आईएएस अफसरों के कुल 224 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 189 अधिकारी ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यानी राज्य पहले से ही 35 अफसरों की कमी से जूझ रहा है. अब अगले आठ महीनों के भीतर गोपालजी तिवारी समेत 8 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के सेवानिवृत्त होने से यह खाली पदों का आंकड़ा बढ़कर 43 तक पहुंच जाएगा. इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली होना राज्य के शासन और महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं की रफ्तार के लिए खतरे की घंटी है.

इसी महीने रिटायर होंगे सुनील कुमार और मनोहर मरांडी
सेवानिवृत्ति के इस सिलसिले की शुरुआत इसी महीने से होने जा रही है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुनील कुमार और मनोहर मरांडी आगामी 30 अप्रैल 2026 को अपने पद से विदा लेंगे. इसके बाद जून में अभय नंदन अंबष्ठ, जुलाई में सुनील सिंह और अगस्त में मनोज कुमार सेवानिवृत्त हो जाएंगे. साल के अंतिम महीनों में भी यह क्रम जारी रहेगा, जहां नवंबर में सत्येंद्र कुमार और गोपालजी तिवारी तथा दिसंबर के अंत में कुमुद सहाय अपनी सरकारी सेवा पूरी करेंगे. एक साथ इतने अनुभवी चेहरों के हटने से विभागों में नेतृत्व का बड़ा शून्य पैदा होने की आशंका है.

विकास कार्यों और योजनाओं पर लटकी तलवार
जानकारों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार से नए अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति नहीं होती या राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के प्रमोशन की फाइलें तेजी से आगे नहीं बढ़तीं, तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है. वरिष्ठ अफसरों की कमी का सीधा असर राज्य के विकास कार्यों और जनता से जुड़ी फाइलों की पेंडेंसी पर पड़ेगा. कई विभागों में एक ही अधिकारी पर कई अतिरिक्त प्रभार का बोझ पहले से ही है, जो आने वाले समय में और बढ़ जाएगा. यह स्थिति सुशासन के दावों के बीच प्रशासनिक बाधा उत्पन्न कर सकती है.

प्रमोशन और प्रतिनियुक्ति ही अब एकमात्र समाधान
राज्य सरकार के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं; पहला यह कि केंद्र से झारखंड कैडर के लिए और अधिक आईएएस अधिकारियों की मांग की जाए और दूसरा, राज्य प्रशासनिक सेवा (State Civil Services) के योग्य अधिकारियों को जल्द से जल्द आईएएस कैडर में प्रमोट किया जाए. यदि समय रहते रिक्तियों को नहीं भरा गया, तो जिलों की मॉनिटरिंग से लेकर सचिवालय के कामकाज तक, हर स्तर पर झारखंड की ब्यूरोक्रेसी में "मैनपावर" का बड़ा संकट खड़ा होना तय है.
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