Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने गोड्डा में अडानी पावर लिमिटेड के थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1363 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. यह याचिका गोड्डा जिले के लगभग 16 गांवों के स्थानीय किसानों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों द्वारा दायर की गई है.
"बिजली निर्यात तो सार्वजनिक उद्देश्य कैसा?"
याचिकाकर्ताओं ने अधिग्रहण के मूल आधार पर ही गंभीर सवाल खड़े किए हैं. याचिका में दलील दी गई है कि इस प्लांट में उत्पादित होने वाली शत-प्रतिशत बिजली का निर्यात बांग्लादेश को किया जाना है. प्रार्थियों का तर्क है कि चूंकि इस परियोजना का सीधा लाभ भारत के आम नागरिकों या स्थानीय जनता को नहीं मिलना है, इसलिए इस भूमि अधिग्रहण को "सार्वजनिक उद्देश्य" (Public Purpose) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. किसानों का कहना है कि व्यावसायिक लाभ के लिए उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण उचित नहीं है.
सहमति और एसआईए प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
याचिका में भूमि अधिग्रहण पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम के उल्लंघन का भी जिक्र है. आरोप लगाया गया है कि अधिग्रहण के लिए अनिवार्य 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति प्राप्त नहीं की गई. इसके अलावा, सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) की प्रक्रिया में लगभग 4,000 प्रभावित लोगों, जिनमें बंटाईदार, खेतिहर मजदूर और अन्य आश्रित शामिल हैं, को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया. याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव रहा है.
एसपीटी एक्ट के उल्लंघन का मुद्दा
भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने का एक अन्य प्रमुख आधार संताल परगना टेनेंसी (SPT) एक्ट का उल्लंघन बताया गया है. याचिका में कहा गया है कि सिंचित और बहु-फसली भूमि (Multi-crop land) का अधिग्रहण कानूनन तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे अंतिम विकल्प के रूप में सिद्ध न कर दिया जाए. अब हाई कोर्ट की एकल पीठ इस मामले में राज्य सरकार और अडानी पावर से जवाब तलब कर सकती है.