Seraikela News : थाना पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अवैध बालू लदे होने के संदेह में पकड़े गए एक टिप ट्रेलर को बिना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और विभागीय जांच के छोड़ दिए जाने का मामला सामने आया है। इससे खनन नियमों के उल्लंघन और राजस्व नुकसान की आशंका गहराती जा रही है।
खनन नियमों की उड़ी धज्जियां, जानिए क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, गम्हरिया थाना पुलिस ने रविवार तड़के एक टिप ट्रेलर को अवैध बालू लदे होने के संदेह में जब्त किया था। नियमों के मुताबिक ऐसे मामलों में जिला खनन पदाधिकारी और परिवहन विभाग को तुरंत सूचना देना अनिवार्य होता है। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने दोनों विभागों को सूचित किए बिना ही वाहन को छोड़ दिया।
खनन नियमों के अनुसार, पुलिस वाहन को केवल संदेह के आधार पर रोक सकती है, लेकिन बालू की वैधता, मात्रा और जुर्माना तय करने का अधिकार खनन एवं परिवहन विभाग के पास होता है। झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली के तहत ऐसे मामलों में विभागीय जांच जरूरी है, जो इस मामले में नहीं की गई।
ओवरलोडिंग और चालान पर सवाल, विभागीय समन्वय की कमी
थाना प्रभारी द्वारा 600 सेफ्टी बालू के चालान की बात कही गई है, जबकि टिप ट्रेलर की क्षमता लगभग 1200 से 1600 सेफ्टी या उससे अधिक बताई जाती है। यदि वाहन पूरी तरह भरा हुआ था तो यह ओवरलोडिंग और अंडर इनवॉइसिंग का स्पष्ट मामला हो सकता है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचता है।
परिवहन विभाग का कहना है कि उन्हें इस मामले की कोई सूचना नहीं दी गई। वहीं पुलिस का दावा है कि चालान वैध था, इसलिए विभाग को जानकारी नहीं दी गई। इस विरोधाभास ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
राजस्व नुकसान की आशंका, जांच की उठी मांग
यदि कम मात्रा का चालान दिखाकर अधिक बालू परिवहन किया जा रहा था, तो सरकार को प्रति ट्रिप हजारों रुपये का नुकसान होने की संभावना है। ऐसे मामलों की नियमित जांच न होने से अवैध खनन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
स्थानीय स्तर पर इस पूरे प्रकरण को पुलिस और खनन माफिया की मिलीभगत से भी जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अवैध खनन पर प्रभावी रोक लग सके।