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  • 2026-04-12

Ranchi Breaking: उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक मामले का उद्भेदन, मुख्य सरगना अतुल वत्स समेत 164 गिरफ्तार, अभ्यर्थियों से हुआ था 10-15 लाख रुपये का सौदा

Ranchi Breaking: रांची पुलिस ने तमाड़ थाना क्षेत्र के एक सुनसान निर्माणाधीन भवन में आधी रात को छापेमारी कर उत्पाद सिपाही परीक्षा माफियाओं के बड़े मंसूबे को नाकाम कर दिया है. एसएसपी राकेश रंजन को मिली गुप्त सूचना पर हुई इस कार्रवाई में गिरोह के 5 मुख्य सदस्यों और 159 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस के पहुंचते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जहां अभ्यर्थी लीक हुए प्रश्न-पत्रों के उत्तर रटने में व्यस्त थे. पुलिस ने घटना स्थल से प्रश्न-उत्तर के सेट, प्रिंटर, संदिग्ध मोबाइल फोन और भारी मात्रा में बैंक चेक व एडमिट कार्ड बरामद किए हैं.

10 से 15 लाख रुपये में बिकी थी सिपाही की नौकरी
जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने के बदले 10 से 15 लाख रुपये वसूले थे. अभ्यर्थियों को इस गुप्त स्थान पर इसलिए लाया गया था ताकि उन्हें लीक हुए सवालों के जवाब याद कराए जा सकें. पुलिस ने मौके से 8 गाड़ियां भी जब्त की हैं जिनका इस्तेमाल अभ्यर्थियों को लाने-ले जाने में किया जा रहा था. रांची डीसी और एसएसपी ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह एक पेशेवर गिरोह है जो झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की साजिश रच रहा था.

बिहार का शातिर अपराधी अतुल वत्स है मास्टरमाइंड
गिरफ्तार गिरोह का मुख्य सरगना बिहार के जहानाबाद का रहने वाला अतुल वत्स है. अतुल का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड बेहद चौंकाने वाला है; वह देश की कई बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में पहले भी जेल जा चुका है. वह 2024 की नीट परीक्षा, यूपी सिपाही भर्ती और राजस्थान क्लर्क भर्ती जैसी परीक्षाओं में भी वांछित रहा है. पुलिस अब अतुल वत्स के स्थानीय नेटवर्क और उन सफेदपोशों की तलाश कर रही है जिन्होंने इस गिरोह को गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद की होगी.

गिरफ्तारी और आगे की बड़ी कार्रवाई की तैयारी
पकड़े गए 164 लोगों में 7 महिला अभ्यर्थी भी शामिल हैं. पुलिस अब जेएसएससी के साथ मिलकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्न-पत्र आयोग के स्तर से लीक हुआ या प्रिंटिंग प्रेस से. उत्पाद सिपाही परीक्षा में हुए इस कांड के बाद राज्य सरकार और चयन आयोग पर एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. फिलहाल, सभी आरोपियों के मोबाइल डेटा को खंगाला जा रहा है ताकि इस सिंडिकेट की गहराई का पता लगाया जा सके. पुलिस ने राज्य भर के एजेंटों के खिलाफ छापेमारी तेज कर दी है.
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