Jharkhand News: बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले से सबक लेते हुए झारखंड के सरकारी विभागों ने वित्तीय सुरक्षा के घेरे को कड़ा कर दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 18.98 करोड़ रूपए का वेतन आवंटन जारी करते हुए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) के लिए नई गाइडलाइंस तय की हैं. अब किसी भी राशि की निकासी से पहले DDO को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित भुगतान वैध है और उसकी दोबारा निकासी नहीं की जा रही है. विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध निकासी के लिए सीधे संबंधित DDO को ही जिम्मेदार माना जाएगा और उन पर कार्रवाई होगी.
बिल पास कराने की प्रक्रिया हुई और भी जटिल
धोखाधड़ी को रोकने के लिए अब हर बिल पर आवंटन आदेश की संख्या और तिथि का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया गया है. DDO को बिल पर यह प्रमाणपत्र भी देना होगा कि वे स्वयं इस निकासी के लिए सक्षम पदाधिकारी हैं और बजट प्रावधानों का उल्लंघन नहीं हो रहा है. इसके अलावा, महालेखाकार (AG) कार्यालय द्वारा हिसाब रखने में होने वाली गलतियों को शून्य करने के लिए विभाग ने विशेष मुहर (Seal) तैयार करने का निर्देश दिया है. इस मुहर में मुख्य शीर्ष, लघु शीर्ष और उपशीर्ष जैसी तकनीकी जानकारियां अंकित होंगी, जिसे हर बिल पर लगाना अनिवार्य होगा.
यूनिटवार खर्च पर विभाग की पैनी नजर
नया आदेश यह भी सुनिश्चित करता है कि आवंटित राशि का एक रूपए भी अतिरिक्त खर्च न हो. प्रत्येक निकासी अधिकारी को यह पूरी तरह सुनिश्चित करना होगा कि इकाईवार (Unit-wise) व्यय उनकी आवंटित सीमा के भीतर ही रहे. अधिक खर्च या नियमों की अनदेखी होने पर जवाबदेही तय करने में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी. स्वास्थ्य विभाग का यह सख्त रुख बताता है कि सरकारी खजाने में होने वाली सेंधमारी को रोकने के लिए अब पुरानी ढुलमुल व्यवस्था को खत्म कर पारदर्शिता और कठोर निगरानी का नया तंत्र लागू कर दिया गया है.