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  • 2026-04-12

West Bengal Election: बंगाल में ममता बनर्जी के समर्थन में हेमंत सोरेन करेंगे आदिवासी इलाकों में प्रचार

West Bengal Election: असम में अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार खत्म करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब पश्चिम बंगाल का रुख कर रहे हैं. वे यहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पक्ष में चुनावी माहौल बनाएंगे. हेमंत सोरेन का मुख्य फोकस बंगाल के उन आदिवासी बहुल क्षेत्रों पर होगा, जहां भाजपा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. झारखंड से सटे जंगलमहल क्षेत्र और उत्तर बंगाल के जिलों में उनकी बड़ी जनसभाएं प्रस्तावित हैं. झामुमो नेताओं के अनुसार, 2021 के चुनाव की तरह इस बार भी सोरेन की मौजूदगी का सकारात्मक असर आदिवासी मतदाताओं पर देखने को मिलेगा.

कल्पना सोरेन भी संभालेंगी मोर्चा, JMM ने नहीं उतारे उम्मीदवार
इस चुनावी अभियान में गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के भी शामिल होने की संभावना है, जिससे प्रचार को और अधिक धार मिलेगी. गौरतलब है कि झारखंड में कांग्रेस के साथ गठबंधन में होने के बावजूद, झामुमो ने पश्चिम बंगाल में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. पार्टी ने स्पष्ट किया है कि बीजेपी को रोकने के लिए वे बिना शर्त ममता बनर्जी का समर्थन करेंगे. झामुमो के सांसद विजय हांसदा और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पुष्टि की है कि पार्टी का पूरा कैडर बंगाल के सीमावर्ती जिलों में टीएमसी के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहा है.

दो चरणों में होगा बंगाल का मतदान, 4 मई को नतीजे
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए इस बार केवल दो चरणों में मतदान होना है. पहले चरण की 152 सीटों के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि दूसरे चरण की 142 सीटों पर 29 अप्रैल को मतदान होगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दौरा पहले चरण के मतदान से ठीक पहले शुरू हो रहा है. चुनाव के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोरेन की लोकप्रिय छवि ममता बनर्जी को उन संताल और आदिवासी क्षेत्रों में मजबूती प्रदान कर सकती है, जहां मुकाबला त्रिकोणीय या द्विपक्षीय है.

साझा विरासत और राजनीतिक रिश्तों की मजबूती
झारखंड और बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में गहरी सामाजिक-सांस्कृतिक समानताएं हैं, जिसका लाभ झामुमो और टीएमसी उठाना चाहते हैं. सांसद विजय हांसदा ने इसे राजनीतिक सहयोग का "स्वाभाविक विस्तार" बताया है. उन्होंने कहा कि संवैधानिक ढांचे पर हो रहे प्रहारों के खिलाफ जेएमएम और टीएमसी संसद के अंदर और बाहर मिलकर लड़ते रहे हैं. अब चुनावी मैदान में हेमंत सोरेन की सक्रियता यह संदेश देगी कि क्षेत्रीय दल अपनी स्वायत्तता और आदिवासी हितों के लिए एकजुट हैं.
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