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  • 2026-04-12

Dhalbhumgarh Airport Updates: धालभूमगढ़ एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, 9 एकड़ विवाद हटते ही आगे बढ़ी प्रक्रिया, चाकुलिया एरोड्रम भी रेस में

Dhalbhumgarh Airport Updates: पूर्वी सिंहभूम जिले में हवाई सेवा को लेकर एक बार फिर उम्मीदें तेज हो गई हैं। धालभूमगढ़ एयरपोर्ट प्रोजेक्ट से जुड़ी बड़ी अड़चन अब दूर होती नजर आ रही है, जहां करीब 9 एकड़ विवादित जमीन को परियोजना से बाहर कर दिया गया है। पहले यह प्रोजेक्ट 249 एकड़ में प्रस्तावित था, लेकिन अब इसे घटाकर 240 एकड़ में विकसित किया जाएगा। देवशोल और रुआशोल मौजा के ग्रामीणों के विरोध के बाद उनकी जमीन को योजना से हटा दिया गया, जिससे लंबे समय से अटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

एएआई टीम ने किया निरीक्षण, तकनीकी पहलुओं पर हुई समीक्षा
शनिवार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की पांच सदस्यीय टीम ने धालभूमगढ़ और चाकुलिया दोनों स्थलों का निरीक्षण किया। डीजीएम (एटीएम) अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पहुंची टीम ने रनवे, सड़क और रेलवे कनेक्टिविटी का जायजा लिया और स्थानीय प्रशासन के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की। निरीक्षण के दौरान टीम ने उपलब्ध जमीन, उसके स्वामित्व, हिस्सेदारी और एयरपोर्ट संचालन में आने वाली तकनीकी चुनौतियों का बारीकी से अध्ययन किया। चाकुलिया में अंचल अधिकारी नवीन पुरती और अन्य कर्मियों के साथ नक्शों का मिलान कर जमीनी स्थिति को समझा गया।

धालभूमगढ़ में अड़चनें, चाकुलिया बना मजबूत विकल्प
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, लेकिन एलिफेंट कॉरिडोर, वन भूमि और धार्मिक स्थलों से जुड़ी बाधाओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि 2024 में मंजूरी मिलने के बाद अब इसे दोबारा गति देने की कोशिश की जा रही है। वहीं दूसरी ओर चाकुलिया का करीब 514 एकड़ में फैला एरोड्रम अब एक बेहतर विकल्प के रूप में उभर रहा है, जहां कम बाधाओं के बीच एयरपोर्ट विकसित करने की संभावनाएं अधिक मानी जा रही हैं। इसको लेकर राजस्व विभाग के साथ जमीन से जुड़े दस्तावेजों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

दो चरणों में होगा विकास, क्षेत्र को मिलेगा औद्योगिक लाभ
योजना के तहत धालभूमगढ़ में पहले चरण में 1,745 मीटर का रनवे और जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जबकि दूसरे चरण में इसे बड़े विमानों के संचालन के लिए विस्तारित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस एयरपोर्ट के बन जाने से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और कोल्हान क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा।

2036 तक 100 नए एयरपोर्ट का लक्ष्य, सर्वे उसी दिशा में कदम
केंद्र सरकार की योजना के तहत वर्ष 2036 तक देशभर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी कड़ी में पुराने एरोड्रम और संभावित स्थलों का सर्वे किया जा रहा है। धालभूमगढ़ और चाकुलिया का निरीक्षण भी इसी मिशन का हिस्सा है, जिससे भविष्य में इस क्षेत्र में हवाई सेवाओं का विस्तार संभव हो सके।

अब सवाल क्या इस बार उड़ान भरेगा प्रोजेक्ट?
लंबे समय से अटके इस प्रोजेक्ट को लेकर अब फिर से हलचल तेज हो गई है, लेकिन सवाल अब भी कायम है कि क्या इस बार धालभूमगढ़ एयरपोर्ट वाकई जमीन पर उतर पाएगा या फिर एक बार फिर यह योजना फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगी।
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