Tata Steel Lease Renewal: टाटा लीज प्रकरण में जिला प्रशासन को एक बार फिर से रेंट और सेस के आंकड़ों में फेरबदल करना होगा. राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने आदेश दिया है कि अब मार्च 2025 के बजाय दिसंबर 2025 तक के बकाये का हिसाब जोड़ा जाए. इससे पहले प्रशासन ने मार्च 2025 तक का कुल बकाया लगभग 319 करोड़ रूपए आंका था, लेकिन लीज की अवधि और गणना के विस्तार के बाद अब इस राशि में बढ़ोतरी होना तय है. टाटा लीज की वर्तमान अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त हो रही है, जिसे देखते हुए विभाग ने भविष्य के नौ महीनों का अतिरिक्त आकलन मांगा है.
दोगुना राजस्व वृद्धि का प्रस्ताव, कोल्हान आयुक्त की मिल चुकी है सहमति
टाटा स्टील प्रबंधन के प्रस्ताव के आलोक में लीज नवीकरण का मसौदा पहले ही राज्य सरकार को भेजा जा चुका है. शुरुआत में जिला प्रशासन राजस्व को तीन गुना बढ़ाने के पक्ष में था, लेकिन कंपनी के तर्कों के बाद इसे दोगुना बढ़ोतरी तक सीमित रखा गया है. इस प्रस्ताव पर कोल्हान आयुक्त की सहमति भी प्राप्त हो चुकी है. गौरतलब है कि टाटा स्टील को आवंटित 10,852.27 एकड़ जमीन का वर्तमान किराया काफी कम है, जो 2 रूपए से लेकर 400 रूपए प्रति एकड़ सालाना तक सीमित है. किराया कम होने के कारण इस पर लगने वाला 75% सेस भी तुलनात्मक रूप से कम ही रहता है.
सीएम से मुलाकात के बाद सरकार के फैसले का इंतजार
लीज नवीकरण के इस महत्वपूर्ण मामले पर टाटा स्टील के एमडी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बीच पहले ही उच्च स्तरीय वार्ता हो चुकी है. हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल वैसी तेजी नहीं दिख रही है जैसी प्रक्रिया की शुरुआत में नजर आई थी. टाटा लीज का इतिहास देखें तो पिछला समझौता भी 10 साल की देरी से वर्ष 2005 में संपन्न हुआ था. अब सबकी नजरें राज्य सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि रेंट और सेस के नए आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की वित्तीय शर्तों और लीज की नई समय सीमा का निर्धारण होगा.