Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने दामोदर और उसकी सहायक कंटेल नदी में तेनुघाट थर्मल पावर प्लांट से फैल रहे प्रदूषण पर कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत ने स्पष्ट किया कि नदियों और उपजाऊ भूमि के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर ऐसी ही लापरवाही दोहराई गई, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. बेरमो अनुमंडल विस्थापित संघर्ष मोर्चा की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोपरि बताया.
प्लांट प्रबंधन ने दी सफाई, नदियों में कचरा न बहाने का लिया संकल्प
सुनवाई के दौरान प्लांट प्रबंधन के अधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी तकनीकी बदलाव और व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं. प्रबंधन ने आश्वस्त किया कि अब प्लांट से निकलने वाले राख और अन्य अवशेष न तो आसपास की उपजाऊ जमीन पर गिराए जाएंगे और न ही उन्हें सीधे नदियों में छोड़ा जाएगा. उत्सर्जन नियंत्रण के लिए किए गए इन उपायों पर संतोष व्यक्त करते हुए अदालत ने याचिका का निष्पादन कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी.
शिकायत मिलने पर दोबारा कोर्ट आने की छूट, विस्थापितों की बड़ी जीत
अदालत ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि भविष्य में प्लांट द्वारा प्रदूषण फैलाने की कोई भी घटना दोबारा सामने आती है, तो वे तुरंत न्याय के लिए पुनः हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. यह आदेश उन ग्रामीणों और विस्थापितों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है जो लंबे समय से प्रदूषित पानी और खराब होती फसल की समस्या झेल रहे थे. इस निर्देश के बाद अब तेनुघाट पावर प्लांट को अपने वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की निरंतर निगरानी करनी होगी, ताकि नदियों की स्वच्छता और भूमि की उर्वरता बनी रहे.