Chakradharpur Railway: चक्रधरपुर रेल मंडल के आसनबनी से झारसुगुड़ा स्टेशन तक अब हाथियों और मवेशियों का रेलवे ट्रैक पर आना नामुमकिन होगा. दक्षिण पूर्व रेलवे ने 270 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के दोनों ओर फेंसिंग (घेराबंदी) करने के लिए 193 करोड़ रुपये की भारी-भरकम योजना को मंजूरी दी है. हाल ही में हुए सर्वे के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस फेंसिंग का दोहरा फायदा होगा; एक तरफ जहां हाथियों की जान बचेगी, वहीं दूसरी तरफ रेलवे को भविष्य में 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित ट्रेनें चलाने में मदद मिलेगी. टाटा-हावड़ा रूट पर कई जगहों पर यह काम पहले ही शुरू किया जा चुका है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से निगरानी और हाथियों के लिए विशेष अंडरपास
रेलवे अब तकनीक के जरिए हाथियों की मौत को शून्य पर लाने की तैयारी में है. इसके लिए ट्रैक पर “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” (AI) आधारित सिस्टम लगाया जा रहा है, जो हाथी के ट्रैक के पास आते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देगा. इसके अलावा, हाथियों के स्वाभाविक आवागमन के लिए 11 संवेदनशील जगहों पर विशेष अंडरपास बनाए जाएंगे. तमिलनाडु में सफल रही इस एआई तकनीक के आने से लोको पायलट को समय रहते सूचना मिल जाएगी, जिससे पिछले 10 साल में बांसपानी और राउरकेला रूट पर ट्रेन की चपेट में आए 15 हाथियों जैसे हादसों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी.
एलिफेंट कॉरिडोर में सुरक्षा का नया घेरा, थमेगा हादसों का सिलसिला
चक्रधरपुर रेल मंडल का अधिकांश हिस्सा झारखंड और ओडिशा के जंगलों से होकर गुजरता है, जहां दर्जनों रेल सेक्शन “एलिफेंट कॉरिडोर” में आते हैं. वर्तमान में हाथियों की मौजूदगी की खबर मिलने पर ट्रेनों की गति धीमी करनी पड़ती है, जिससे समय की बर्बादी होती है. वन विभाग के साथ मिलकर तैयार की गई इस नई योजना से ट्रेनों का परिचालन बिना किसी बाधा के तेज होगा. रेलवे की यह पहल न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने की दिशा में भी एक आधुनिक और प्रभावी कदम साबित होगी.