Jharkhand News: झारखंड में युवाओं को खोखला कर रहे नशीले पदार्थों के बढ़ते अवैध कारोबार पर हाईकोर्ट ने कड़ा और कड़ा रुख अख्तियार किया है. मुख्य न्यायाधीश एस. एम. सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ द्वारा मामले पर लिए गए स्वतः संज्ञान की सुनवाई के दौरान राज्य की सीआईडी ने नशामुक्त अभियान के लिए दो विस्तृत एसओपी (SOP) अदालत के सामने पेश की. माननीय अदालत ने चिंता जताई कि एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत छोटे-मोटे मामले तो दर्ज हो रहे हैं, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियां इस धंधे के असली आकाओं (Kingpin) और सिंडिकेट के सरगनाओं तक पहुंचने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई हैं.
सिंडिकेट और फाइनेंस नेटवर्क को ध्वस्त करने के कड़े निर्देश
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इस अवैध धंधे की बड़ी मछलियों और उनके हवाला व फाइनेंस नेटवर्क की कड़ाई से जांच नहीं होगी, तब तक इस समस्या का समाधान मुमकिन नहीं है. हाईकोर्ट ने सीआईडी द्वारा पेश की गई दोनों एसओपी को तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू करने का कड़ा निर्देश सरकार को दिया है. इसके साथ ही अदालत ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), अपराध जांच विभाग (CID) और स्थानीय झारखंड पुलिस को आपस में कड़ा समन्वय (Coordination) बनाकर ज्वाइंट ऑपरेशन चलाने और इस सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने को कहा है.
स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने के आदेश के साथ याचिका निष्पादित
नशे की गिरफ्त में आ रही युवा पीढ़ी को बचाने के लिए अदालत ने सभी शिक्षण संस्थानों, विशेषकर स्कूल और कॉलेजों में एंटी-ड्रग जागरूकता अभियानों को युद्ध स्तर पर तेज करने की कड़ी हिदायत दी है. कोर्ट का मानना है कि कड़े कानूनी एक्शन के साथ-साथ युवाओं को इसके प्रति जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है. राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियों को कड़े दिशा-निर्देश और भविष्य की रूपरेखा तय करने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका को पूरी तरह से निष्पादित (Dispose) कर दिया है.