West Bengal Breaking: पश्चिम बंगाल पुलिस ने शुक्रवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के कद्दावर नेता और पेशे से वकील मोफक्करुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया है. मोफक्करुल पर बुधवार को मालदा में हुई भीषण हिंसा और विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने का मुख्य आरोप है. पुलिस के मुताबिक, वह इस पूरे मामले का मुख्य साजिशकर्ता है. जब राज्य पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी, तब वह पश्चिम बंगाल से भागने की फिराक में बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंच गया था, जहां से उसे पुलिस ने धर-दबोचा. गौरतलब है कि मोफक्करुल इस्लाम ने साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में इटाहार सीट से एआईएमआईएम के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था.
अधिकारियों और 5 साल के बच्चे को बनाया बंधक
बता दें कि बुधवार को मालदा के कालियाचक II ब्लॉक विकास कार्यालय (BDO) में उस वक्त कोहराम मच गया था, जब चुनाव की "विशेष गहन पुनरीक्षण" (SIR) प्रक्रिया की देखरेख कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को उग्र प्रदर्शनकारियों ने 9 घंटे से अधिक समय तक बंधक बना लिया था. इस SIR प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची से 63 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे, जबकि 60 लाख अन्य को "न्यायिक प्रक्रिया के अधीन" रखा गया था. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही ये अधिकारी समीक्षा कर रहे थे. अधिकारियों से मिलने से मना किए जाने पर भड़के प्रदर्शनकारियों ने शाम 4 बजे दफ्तर घेर लिया. बंधक बनाए गए अधिकारियों में तीन महिलाएं और एक अधिकारी का 5 साल का मासूम बच्चा भी शामिल था. आधी रात को जब पुलिस इन्हें छुड़ाने पहुंची, तो उनकी गाड़ियों पर जमकर पथराव किया गया.
सुप्रीम कोर्ट की फटकार: "राज्य की आपराधिक विफलता"
यह मामला गुरुवार को देश की सर्वोच्च अदालत पहुंचा, तो सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन की बखिया उधेड़ दी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने इस घटना को पश्चिम बंगाल सरकार की "आपराधिक विफलता" करार दिया. कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, डीजीपी, एसपी और मालदा के डीएम को कड़ी फटकार लगाई. मुख्य न्यायाधीश ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल देश का "सबसे ध्रुवीकृत राज्य" बन चुका है, जहां अदालती आदेशों के अनुपालन से ऊपर गंदी राजनीति को रखा जा रहा है. उन्होंने साफ कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को डराने और सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को सीधी चुनौती देने का घिनौना प्रयास है.
जांच अब CBI या NIA को, अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात होंगे केंद्रीय बल
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद सख्त आदेश जारी किए हैं. शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि वह इस पूरी घटना की जांच तत्काल केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) या एनआईए (NIA) को सौंपे. इसके अलावा, राज्य पुलिस पर से भरोसा उठाते हुए कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों (Central Forces) को तैनात करने का हुक्म दिया है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अब से बीडीओ परिसर में एक समय में 3 से 5 से ज्यादा लोग प्रवेश नहीं करेंगे. साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी और डीएम को 6 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर यह जवाब देने को कहा है कि इस बड़ी चूक के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए.