Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-03-30

Health Care: दवाओं के दाम आसमान छूने लगे, इंडस्ट्री मांग रही है कोविड-19 जैसी छूट, कालाबाजारी रोकने के लिए इजेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू करने पर विचार

Health Care: सरकार दवाओं और उनके मुख्य घटकों की कीमत बढ़ने और जमाखोरी को रोकने के लिए इजेंशियल कमोडिटीज एक्ट लागू करने पर विचार कर रही है। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि फार्मा विभाग (DoP) ने इस पर हाल ही में उद्योग के अधिकारियों के साथ बैठक भी की है।


सरकार क्यों कदम उठा रही है

मिडल ईस्ट में हाल ही में चल रहे हालातों के बीच दवा और उनके कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इस वजह से सरकार सोच रही है कि क्या जरूरी सामान की तरह दवाओं और उनके घटकों पर भी कंट्रोल लगाया जाए, ताकि कालाबाजारी और जमाखोरी रोकी जा सके।


कच्चे माल की कीमतें आसमान छू रही हैं

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संघर्षों की वजह से फार्मा इंडस्ट्री को बहुत नुकसान हुआ है। कई महत्वपूर्ण कच्चे माल की सप्लाई रुक गई है, जिससे कीमतें 200 से 300 फीसदी तक बढ़ गई हैं। PNG (प्राकृतिक गैस) की कमी और कंटेनरों की कमी ने सप्लाई और महंगी कर दी है। सरकार ने उद्योग के साथ विस्तृत चर्चा की है और जल्द ही फैसला लेने वाली है।


कौन-कौन सी चीजें महंगी होगी 

APIs और सॉल्वैंट्स – पिछले हफ्तों में 30-35 फीसदी तक महंगे हुए।

ग्लिसरीन – 64 फीसदी महंगी हुई।

पैरासिटामोल – 25 फीसदी महंगी।

सिप्रोफ्लोक्सासिन – 30 फीसदी महंगी।

पैकेजिंग सामग्री – जैसे पॉलीविनाइल क्लोराइड और एल्यूमिनियम फॉयल, 40 फीसदी महंगे हो गए।


दवाओं पर इसका असर 

ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकोल और सॉल्वैंट्स जैसी चीजें, जो सिरप, ओरल ड्रॉप्स और स्टेराइल दवाओं में इस्तेमाल होती हैं, बहुत महंगी हो गई हैं। मैनकाइंड फार्मा के सीनियर प्रेसिडेंट अभय श्रीवास्तव के मुताबिक, सप्लाई कम होने और कीमत बढ़ने की वजह से दवा बनाने वाली कंपनियां और पैकेजिंग सप्लायर दोनों ही दबाव में हैं।


इंडस्ट्री मांग रही है कोविड के समय वाली छूट और सपोर्ट

इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार कोविड 19 के समय की तरह छूट दे। उस समय कंपनियों को जरूरी चीजों की लिस्ट में शामिल करके प्रोडक्शन जारी रखने की अनुमति मिली थी। Pharmexcil ने भी कहा कि बढ़ती कीमतों को संभालने के लिए माल ढुलाई पर सब्सिडी और लॉजिस्टिक्स में मदद दी जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निर्माण में रुकावट आई, तो इसका असर सिर्फ देश के मरीजों पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी पड़ेगा, जो भारत पर बहुत निर्भर है।

WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !