Tata Steel Coal Mining: कोयला खनन से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में टाटा स्टील लिमिटेड को अंतरिम राहत मिली है. कोयला मंत्रालय की रिविजनल अथॉरिटी ने कंपनी की याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि मामले के निपटारे तक किसी प्रकार की दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न की जाए.
कंपनी ने 28 मार्च को इस संबंध में जानकारी सेबी के लिस्टिंग प्रावधानों के तहत स्टॉक एक्सचेंज को दी है. यह पूरा मामला धनबाद जिले के झरिया क्षेत्र में स्थित कंपनी की कोलियरियों से जुड़ा हुआ है.
जानकारी के मुताबिक जिला खनन पदाधिकारी, धनबाद ने टाटा स्टील पर निर्धारित सीमा से अधिक कोयला उत्पादन करने का आरोप लगाते हुए करीब 385.19 करोड़ रुपये की मांग नोटिस जारी किया था. यह मांग वित्तीय वर्ष 2000-01 से 2016-17 के बीच कथित अतिरिक्त उत्पादन के आधार पर की गई थी.
कंपनी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए कोयला मंत्रालय की रिविजनल अथॉरिटी में वर्ष 2026 की रिविजन याचिकाएं दाखिल कीं. अथॉरिटी ने 24 मार्च को आदेश पारित करते हुए याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना और संबंधित पक्षों को अगली प्रक्रिया तक कोई कठोर कदम नहीं उठाने को कहा.
इस मामले में टाटा स्टील याचिकाकर्ता है, जबकि झारखंड सरकार का खान एवं भूविज्ञान विभाग और धनबाद के जिला खनन पदाधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया है. मामले की सुनवाई नई दिल्ली स्थित अथॉरिटी में की जाएगी.
कंपनी की ओर से कहा गया है कि मामला अभी विचाराधीन है, इसलिए फिलहाल इसका कोई वित्तीय प्रभाव नहीं पड़ेगा.