Adityapur: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी तनाव का असर अब औद्योगिक क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कई प्रमुख रसायनों की कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ गई है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
सोडियम सायनाइड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड महंगे
उद्योगों में उपयोग होने वाला सोडियम सायनाइड, जो जिंक प्लेटिंग, गोल्ड प्रोसेसिंग और धातु उद्योग में जरूरी होता है, उसकी कीमत 205 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 315 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
वहीं हाइड्रोजन पेरोक्साइड, जिसका इस्तेमाल कॉपर, कपड़ा और धातु प्रसंस्करण में होता है, उसकी कीमत 23.50 रुपये से बढ़कर लगभग 57 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
उत्पादन पर असर, बंदी का खतरा
उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो कई इकाइयों को उत्पादन घटाना या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। पूरे राज्य में ऐसे 150 से अधिक कारखाने प्रभावित हो सकते हैं, जिससे करीब 20 हजार कामगारों की आजीविका पर संकट मंडरा सकता है।
आदित्यपुर में 50 से ज्यादा इकाइयों पर संकट
आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, केवल आदित्यपुर क्षेत्र में ही 50 से अधिक फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर हैं। इससे यहां कार्यरत लगभग 10 हजार श्रमिकों पर सीधा असर पड़ सकता है।
आपूर्ति में कमी और बढ़ती लागत
व्यापारियों का कहना है कि बांग्लादेश में डीजल संकट के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे रसायनों की आपूर्ति कम हो गई है। इसके अलावा अमोनियम नाइट्रेट (पावर जेल) और कास्टिक सोडा जैसे अन्य रसायनों की कीमतों में भी तेजी आई है, जो आयरन ओर, कॉपर और अन्य धातु उद्योगों में उपयोग किए जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मार्ग और आयात में बाधा
रसायनों का आयात मुख्य रूप से ईरान मार्ग के जरिए होता है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण इस मार्ग पर असर पड़ा है। इसके साथ ही होर्मुज क्षेत्र से आने वाले कंटेनरों पर शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त शुल्क वसूल रही हैं, जो लगभग 2 लाख रुपये तक पहुंच रहा है। इसका सीधा बोझ उद्योगों पर पड़ रहा है।
धातु कीमतों में गिरावट से बढ़ी चिंता
एक ओर जहां रसायनों की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर कॉपर, गोल्ड समेत कई धातुओं के दाम में गिरावट भी देखी जा रही है। इससे उद्योगों की लागत और मुनाफे के बीच संतुलन बिगड़ रहा है, जो व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।