Prabhat Park Adityapur: आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड 17 स्थित प्रभात पार्क में मॉर्निंग वॉक बंद होने से स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश है. नगर निगम द्वारा जारी टेंडर की शर्तों के अनुसार, सुबह 6 से 8 बजे तक बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के टहलने के लिए पार्क खुला रहना अनिवार्य है. इसके बावजूद, संवेदक द्वारा पार्क के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर दी गई है, जिससे क्षेत्रीय जनता अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य लाभ से वंचित हो गई है. इस गंभीर मुद्दे पर स्थानीय वार्ड पार्षद की चुप्पी ने भी जनता की नाराजगी को और बढ़ा दिया है.
अतिक्रमण का जाल और अवैध वसूली के गंभीर आरोप
पार्क के चारों ओर दुकानदारों द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है. सूत्रों के हवाले से चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि पार्क के बाहर अवैध रूप से दुकान लगाने के बदले संवेदक द्वारा प्रत्येक दुकानदार से प्रतिमाह 7 हजार से 8 हजार रुपये तक की भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है. यह अवैध वसूली न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि नगर निगम के राजस्व को भी सीधे तौर पर चपत लगा रही है.
स्थानीय लोगों का बढ़ा मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संकट
प्रभात पार्क वर्षों से स्थानीय लोगों की सुबह की सैर और ताजी हवा का एकमात्र जरिया रहा है. अब पार्क बंद होने से लोगों को व्यस्त और प्रदूषित सड़कों पर टहलने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है. बुजुर्गों का कहना है कि पार्क उनकी सामाजिक दिनचर्या का हिस्सा था, जिसे अब व्यावसायिक स्वार्थ की भेंट चढ़ा दिया गया है. जनता की मांग है कि नगर निगम तुरंत हस्तक्षेप करे और टेंडर की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संवेदक पर कड़ी कार्रवाई कर पार्क को पुनः खुलवाए.
प्रशासनिक आश्वासन और जवाबदेही पर लटकी तलवार
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब आदित्यपुर नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले की गहराई से जांच करवाने का औपचारिक आश्वासन दिया है. हालांकि, स्थानीय जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है और तत्काल धरातल पर बदलाव चाहती है. सवाल यह उठता है कि क्या निगम प्रशासन इन रसूखदार अतिक्रमणकारियों और नियमों को तोड़ने वाले संवेदक पर नकेल कस पाएगा या वार्ड 17 की जनता को अपने हक के लिए और लंबा इंतजार करना होगा?