इस ऑयल मिल की सबसे खास बात यह है कि यहां आज भी वही पुरानी मशीन इस्तेमाल हो रही है, जिसे वर्षों पहले मालिक के दादा ने लगवाया था। मिल के संचालक अंकित अग्रवाल बताते हैं कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियां इस मिल से जुड़ी रही हैं और लगातार इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। समय के साथ तकनीक बदली, मशीनें बदलीं, लेकिन इस मिल की कार्यप्रणाली आज भी बिना किसी बड़े बदलाव के पहले जैसी ही है।
मिल परिसर में आज भी ब्रिटिश काल का पंखा और पुराना लोहे का गेट मौजूद है, जो इस जगह को एक ऐतिहासिक पहचान देता है। यह सिर्फ एक ऑयल मिल नहीं, बल्कि एक जीवंत धरोहर है, जो बीते दौर की यादों को आज भी संजोए हुए है।
यह मशीन हर दिन सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक लगातार 12 घंटे चलती है और शहरवासियों को शुद्ध सरसों का तेल उपलब्ध कराती है। यहां निकाला जाने वाला तेल पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से तैयार होता है, जिसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं होती। यही कारण है कि आज भी लोगों का इस मिल पर भरोसा कायम है।
कीमत की बात करें तो यहां काले सरसों का तेल करीब 210 रुपये प्रति लीटर और पीले सरसों का तेल लगभग 360 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है। कीमत अधिक होने के बावजूद ग्राहकों की कमी नहीं है। जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों से भी लोग यहां खास तौर पर तेल खरीदने पहुंचते हैं।
बाबा ऑयल मिल इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर किसी परंपरा में गुणवत्ता और विश्वास जुड़ा हो, तो वह समय की कसौटी पर हमेशा खरा उतरता है। 100 साल पुरानी यह विरासत आज भी उसी जुनून और निरंतरता के साथ आगे बढ़ रही है।