Purple Day 2026: मिर्गी को लेकर आज भी बहुत सारी गलतफहमियां और अंधविश्वास हैं। कई लोग सोचते हैं कि यह कोई मानसिक बीमारी या कोई अभिशाप है। लेकिन सच यह है कि मिर्गी एक दिमाग की बीमारी (न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर) है। दुनिया भर में लाखों लोग इससे प्रभावित हैं, लेकिन जानकारी की कमी की वजह से अक्सर सही समय पर मदद नहीं मिल पाती। इसी लिए हर साल 26 मार्च को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी जागरूकता दिवस (Purple Day) मनाया जाता है।
कनाडा की 9 साल की लड़की कैसिडी मेगन ने इस दिन की शुरुआत की
2008 में कनाडा की 9 साल की लड़की कैसिडी मेगन ने इस दिन की शुरुआत की। कैसिडी खुद मिर्गी से जूझ रही थीं और चाहती थीं कि लोग इस बीमारी को समझें और मरीजों को अकेला न छोड़ें। उन्होंने बैंगनी रंग चुना क्योंकि लैवेंडर फूल अकेलेपन और साहस का प्रतीक माना जाता है। कैसिडी के इस विचार को Epilepsy Association of Nova Scotia ने समर्थन दिया और यह जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय आंदोलन बन गया। आज 85 से ज्यादा देशों में लोग इस दिन बैंगनी कपड़े पहनकर जागरूकता फैलाते हैं।
मिर्गी क्या है?
हमारा दिमाग विद्युत संकेतों के जरिए काम करता है। जब दिमाग की कोशिकाओं में अचानक और अनियंत्रित विद्युत गतिविधि होती है, तो दौरा (Seizure) पड़ता है। दौरा कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक चल सकता है। हर किसी में लक्षण अलग हो सकते हैं। कुछ लोग अचानक सुन्न हो जाते हैं।
कुछ के शरीर में तेज झटके लगते हैं।
दौरा पड़ने पर क्या करें
शांत रहें और मरीज के पास रहें। मरीज के आसपास से कठोर या नुकीली चीजें हटा दें। सिर के नीचे नरम कपड़ा या तकिया रखें। दौरे के बाद मरीज को धीरे से करवट दिलाएं, ताकि सांस लेने में आसानी हो। दौरे की अवधि नोट करें। अगर दौरा 5 मिनट से ज्यादा चले, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं।
दौरा पड़ने पर क्या नहीं करना चाहिए
मरीज के मुंह में कभी चम्मच, कपड़ा या पानी न डालें। दौरे के दौरान मजबूरी से पकड़ने या झटके रोकने की कोशिश न करें। अंधविश्वासी चीजें, जैसे प्याज खिलाना या जूता सुंघाना, बिल्कुल न करें।
इलाज और मदद
आज मिर्गी का इलाज संभव है। लगभग 70 प्रतिशत मामलों में दवाओं से दौरे पूरी तरह नियंत्रित किए जा सकते हैं। जिन मरीजों पर दवा काम नहीं करती, उनके लिए कीटोजेनिक डाइट, वेगस नर्व स्टिमुलेशन, और एडवांस सर्जरी जैसे विकल्प हैं।
EEG और MRI स्कैन से सही निदान में मदद मिलती है।
Purple Day सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि एक वादा है मिर्गी से जूझ रहे लोगों का साथ देने का। अगर हम सही जानकारी रखें और समय पर डॉक्टर से सलाह लें, तो मिर्गी के मरीज भी पूरी तरह सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।