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  • 2026-03-26

Jharkhand Budget Expenditure Report: 1.11 लाख करोड़ की स्वीकृति के बाद 91 हजार करोड़ खर्च, 25 हजार करोड़ सरेंडर होने का अनुमान

Jharkhand Budget Expenditure Report: झारखंड सरकार के चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन में अब मात्र पांच दिन शेष हैं. कुल 1 लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में से सरकार ने अब तक 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है, जिसमें से वास्तव में 91 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं. वहीं, केंद्रीय योजनाओं के मद में 6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यय हुआ है. मौजूदा रफ्तार को देखते हुए वित्त विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगभग 20-25 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च न हो पाने के कारण सरेंडर करनी पड़ सकती है.

अंतिम माह की 15% सीमा और पिछड़ते विभाग
वित्तीय नियमों की कड़ाई के कारण विभागों के लिए शेष राशि का उपयोग करना एक बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि नियमतः अंतिम महीने में कुल बजट का अधिकतम 15% ही खर्च किया जा सकता है. आंकड़ों के अनुसार, कृषि विभाग को अभी भी 1009.85 करोड़ रुपये खर्च करने हैं, जबकि पशुपालन, खान और परिवहन जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग अपने आवंटित बजट की आधी राशि भी खर्च नहीं कर पाए हैं. पेयजल विभाग का प्रदर्शन भी चिंताजनक है, जहां 3841.66 करोड़ रुपये के बजट में से केवल 1122.13 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके हैं.

वित्त सचिव का सख्त निर्देश: 31 मार्च तक करें ऑनलाइन प्रत्यर्पण
वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने सभी विभागों के आला अधिकारियों को कड़ा निर्देश जारी किया है. उन्होंने कहा है कि जिस राशि का व्यय 31 मार्च तक संभव नहीं है, उसे ऑनलाइन “प्रत्यर्पण” (Surrender) कर दिया जाए. सचिव ने स्पष्ट किया कि जो राशि इस समय सीमा तक खर्च या प्रत्यर्पित नहीं होगी, उसे “लैप्स” (Lapse) माना जाएगा. इस प्रक्रिया के लिए विभागों को वित्त विभाग की अलग से सहमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, ताकि प्रक्रिया में देरी न हो और बजट का प्रबंधन पारदर्शी तरीके से किया जा सके.

प्रमुख विभागों के खर्च का लेखा-जोखा (करोड़ रुपये में)
बजट और खर्च के विश्लेषण में महिला एवं बाल विकास विभाग 22138.90 करोड़ रुपये के भारी बजट और 18650.35 करोड़ रुपये के खर्च के साथ सबसे आगे है. ऊर्जा विभाग ने भी 10480.47 करोड़ रुपये में से 8746.82 करोड़ रुपये खर्च कर अच्छी प्रगति दिखाई है. इसके विपरीत, खान विभाग ने 364.64 करोड़ रुपये के मुकाबले मात्र 117.81 करोड़ रुपये और परिवहन विभाग ने 162.03 करोड़ रुपये में से केवल 42.61 करोड़ रुपये ही खर्च किए हैं. ग्रामीण विकास और स्कूली शिक्षा जैसे बड़े बजट वाले विभागों में भी क्रमशः 3 हजार करोड़ रुपये और 2400 करोड़ रुपये के आसपास की राशि अभी खर्च होना शेष है.
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