Pakur Illegal Mining: झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ जिले में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पर्यावरण स्वीकृति (EC) प्राप्त कर खनन पट्टा हासिल करने वाली आठ कंपनियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इन कंपनियों के विरुद्ध प्रारंभिक जांच शुरू करने पर जल्द निर्णय लिया जाए. यह आदेश आरटीआई एक्टिविस्ट पंकज यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें उन्होंने दोषी कंपनियों पर प्राथमिकी दर्ज कर गहन जांच की मांग की है.
लीज तो रद्द हुई, पर एसीबी जांच अब भी लंबित
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रार्थी की शिकायत सही पाए जाने पर सभी आठों कंपनियों का खनन पट्टा (लीज) पहले ही रद्द किया जा चुका है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में निगरानी विभाग से पीई (प्रारंभिक जांच) शुरू करने की अनुमति मांगी थी, जो फिलहाल सचिवालय स्तर पर लंबित है. इस पर नाराजगी जताते हुए जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय की अदालत ने निगरानी विभाग के सचिव को चार सप्ताह के भीतर इस पर अंतिम फैसला लेने का आदेश दिया है.
सरकारी तंत्र की मिलीभगत की भी होगी जांच
याचिकाकर्ता का आरोप है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खनन पट्टा हासिल करना मुमकिन नहीं है. हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद अब उन अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है जिन्होंने इन फर्जी कागजातों की स्क्रूटनी किए बिना ही क्लीयरेंस दे दी थी. अदालत ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
अगले एक महीने में शुरू हो सकती है बड़ी कार्रवाई
निगरानी विभाग को मिले चार सप्ताह के समय के बाद पाकुड़ में सक्रिय रहे खनन माफियाओं की मुश्किलें बढ़ना तय है. अगर निगरानी विभाग एसीबी को जांच की हरी झंडी दे देता है, तो संबंधित कंपनियों के निदेशकों और संलिप्त सरकारी कर्मियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक सकती है. पाकुड़ जिला प्रशासन भी अब रद्द की गई लीज वाली जमीनों की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है.