Jharkhand Women Commission: राज्यसभा में सांसद स्वाति मालीवाल ने झारखंड महिला आयोग के पिछले 4 साल से बंद होने का गंभीर मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि जून 2020 से आयोग में न तो अध्यक्ष हैं और न ही सदस्य, जिससे राज्य की पीड़ित महिलाएं न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं. मालीवाल ने सवाल किया कि "जब न्याय दिलाने वाली संस्थाएं ही ताले में बंद रहेंगी, तो महिलाएं अपनी गुहार लेकर आखिर कहां जाएं?"
हर 15 मिनट में रेप, पर संस्थाएं कमजोर
सांसद ने देश में महिला सुरक्षा के खोखले दावों पर प्रहार करते हुए कहा कि भारत में हर 15 मिनट में एक महिला के साथ दरिंदगी होती है. इसके बावजूद राष्ट्रीय और राज्य महिला आयोगों को पर्याप्त अधिकार और संसाधन नहीं दिए जा रहे हैं. उन्होंने चिंता जताई कि संसदीय समितियों की सिफारिशें सालों से धूल फांक रही हैं और दिल्ली महिला आयोग जैसी सक्रिय संस्थाओं को भी अब फंड रोककर धीरे-धीरे निष्प्रभावी बनाया जा रहा है.
आधी रात के रेस्क्यू और रूह कंपा देने वाली घटनाएं
मालीवाल ने सदन में उन रूह कंपा देने वाली घटनाओं का जिक्र किया, जहां 14 साल की बच्चियों को गर्म इस्तरी से जलाया गया और नेपाल की 39 लड़कियों को मानव तस्करी से बचाया गया. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे बड़े ऑपरेशन तभी संभव होते हैं जब महिला आयोग 24 घंटे सक्रिय और मजबूत हो. उन्होंने मध्य प्रदेश की उस पीड़िता का भी उदाहरण दिया जिसे ससुराल वालों ने तेजाब पिला दिया था, यह बताने के लिए कि समाज में अपराध किस हद तक बढ़ चुका है.
स्वायत्तता और संसाधनों की मांग
सदन के माध्यम से स्वाति मालीवाल ने सरकार से मांग की कि महिला आयोगों को केवल "कागजी शेर" न बनाकर उन्हें असली स्वायत्तता और पर्याप्त बजट दिया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि झारखंड और दिल्ली जैसे राज्यों में आयोगों को तुरंत बहाल नहीं किया गया, तो देश की आधी आबादी के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना नामुमकिन हो जाएगा. उन्होंने संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की अपील की ताकि पीड़ित महिलाओं को समय पर मदद मिल सके.