PM Modi In Rajya Sabha: राज्यसभा में पीएम मोदी बोले, "होर्मुज जलडमरूमध्य" में बाधा स्वीकार नहीं, बातचीत से ही निकलेगा समाधानपश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राज्यसभा में भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि "Strait Of Hormuz" में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार देश की ऊर्जा जरूरतों और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है.
तनाव की मुख्य वजह
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है. इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले समुद्री मार्ग, विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट, अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. यहां किसी भी प्रकार की रुकावट से तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होती है.
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्तमान स्थिति के कारण कई जहाज प्रभावित हुए हैं और सामान पहुंचने की पूरी व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है. इसका असर भारत जैसे देशों पर अधिक पड़ता है, जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं.
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है
दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है. भारत अपनी तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है. गैस और एलपीजी की सप्लाई भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर है
ऐसी स्थिति में यदि इस मार्ग में बाधा आती है, तो देश में ईंधन की कमी, कीमतों में उछाल और महंगाई बढ़ाव की संभावना रहती है.
सरकार की कार्रवाई
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कमर्शियल जहाजों पर हमले और समुद्री मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है. भारत इस मुद्दे पर ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ लगातार संपर्क में है.
देशों के बीच समझदारी से बातचीत करके समस्या हल करने की कोशिश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तेल और गैस की आपूर्ति बाधित न हो. सरकार का उद्देश्य यह है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें बिना रुकावट पूरी होती रहें और बाजार में स्थिरता बनी रहे.
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा
खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं. अब तक करीब 3.75 लाख भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है. ईरान से 1000 से अधिक नागरिकों की वापसी हुई है, और बताया जा रहा है कि इनमें 700 से अधिक छात्र शामिल हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
शांति के लिए भारत का दृष्टिकोण
भारत ने हमेशा से विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति यानि बात चित का समर्थन किया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संकट शुरू होने के बाद से उन्होंने क्षेत्र के कई देशों के नेताओं के साथ बातचीत की है, ताकि तनाव कम किया जा सके.
मिडिल ईस्ट में जारी संकट का सीधा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है. ऐसे में भारत का रुख स्पष्ट है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनी रहनी चाहिए और शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है. सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठा रही है.