Chaiti Chhath 2026: छठ पूजा के पावन अवसर पर आज तीसरा दिन मनाया जा रहा है, जिसे संध्या अर्घ्य का दिन कहा जाता है। सुबह की हल्की ठंडक और भक्तिमय माहौल के बीच व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हुए शाम को अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी माध्यम है।
संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व
छठ महापर्व का यह दिन पूरी तरह सूर्यास्त के समय होने वाली पूजा को समर्पित होता है। व्रती महिलाएं और पुरुष नदी, तालाब या अन्य जल स्रोतों में खड़े होकर डूबते सूर्य की किरणों को नमन करते हैं। जल में खड़े होकर अर्घ्य देना इस पर्व का सबसे भावनात्मक और आध्यात्मिक क्षण माना जाता है, जहां श्रद्धा और भक्ति अपने चरम पर होती है।
घाटों पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
जैसे-जैसे शाम का समय नजदीक आता है, घाटों का दृश्य बेहद आकर्षक और भक्तिमय हो उठता है। पारंपरिक लोकगीत, ढोलक की धुन और “छठी मईया” के जयकारे वातावरण को भक्ति में सराबोर कर देते हैं। बांस के सूप में ठेकुआ, फल, नारियल और गन्ना सजाकर श्रद्धालु विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित करते हैं। कई लोग अब अपने घरों की छत या आंगन में कृत्रिम घाट बनाकर भी इस परंपरा को निभा रहे हैं।
डूबते सूर्य की पूजा का संदेश
इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसमें उगते सूर्य के साथ-साथ अस्त होते सूर्य को भी समान श्रद्धा से पूजा जाता है। यह परंपरा जीवन के हर चरण चाहे वह शुरुआत हो या अंत को स्वीकार करने और सम्मान देने का संदेश देती है। यही कारण है कि छठ को अन्य पर्वों से अलग और विशेष माना जाता है।
शाम होते ही घाटों पर उमड़ती है भीड़
जैसे-जैसे शाम का समय नजदीक आता है, घाटों का दृश्य बेहद आकर्षक और भक्तिमय हो उठता है। पारंपरिक लोकगीत, ढोलक की धुन और “छठी मईया” के जयकारे वातावरण को भक्ति में सराबोर कर देते हैं। बांस के सूप में ठेकुआ, फल, नारियल और गन्ना सजाकर श्रद्धालु विधि-विधान से अर्घ्य अर्पित करते हैं। कई लोग अब अपने घरों की छत या आंगन में कृत्रिम घाट बनाकर भी इस परंपरा को निभा रहे हैं।
डूबते सूर्य की पूजा का संदेश
इस पर्व की सबसे खास बात यह है कि इसमें उगते सूर्य के साथ-साथ अस्त होते सूर्य को भी समान श्रद्धा से पूजा जाता है। यह परंपरा जीवन के हर चरण चाहे वह शुरुआत हो या अंत को स्वीकार करने और सम्मान देने का संदेश देती है। यही कारण है कि छठ को अन्य पर्वों से अलग और विशेष माना जाता है।
शहरों के अनुसार अर्घ्य का समय
आज संध्या अर्घ्य सूर्यास्त के समय दिया जाएगा। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, लेकिन सामान्यत यह शाम के समय होता है। व्रती सूर्यास्त से कुछ देर पहले ही घाटों पर पहुंचकर पूजा की तैयारी शुरू कर देते हैं, ताकि अंतिम किरणों के साथ अर्घ्य अर्पित किया जा सके।
शहरों के अनुसार संध्या अर्घ्य का समय (24 मार्च 2026)
दिल्ली – शाम 06:35 बजे
नोएडा – शाम 06:34 बजे
मुंबई – शाम 06:51 बजे
पुणे – शाम 06:46 बजे
पटना – शाम 06:02 बजे
छपरा – शाम 06:04 बजे
बेगूसराय – शाम 05:58 बजे
गया – शाम 06:34 बजे
रांची – शाम 06:01 बजे
कोलकाता – शाम 05:49 बजे
प्रयागराज – शाम 06:15 बजे
भोपाल – शाम 06:33 बजे
लखनऊ – शाम 06:19 बजे
गोरखपुर – शाम 06:10 बजे
मुजफ्फरपुर – शाम 06:01 बजे
जमशेदपुर – शाम 05:56 बजे
बोकारो – शाम 05:58 बजे
भागलपुर – शाम 05:55 बजे
वाराणसी – शाम 06:11 बजे
मऊ – शाम 06:09 बजे
देवघर – शाम 05:56 बजे
आधुनिक दौर में भी कायम परंपरा
तेजी से बदलती जीवनशैली के बावजूद छठ महापर्व की महत्ता कम नहीं हुई है। बड़े शहरों में रहने वाले लोग भी इस अवसर पर अपने घर लौटते हैं या जहां हैं वहीं पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं। नई पीढ़ी भी इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है, जिससे यह परंपरा और भी मजबूत होती जा रही है।
कल उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा समापन
संध्या अर्घ्य के बाद छठ महापर्व अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर जाता है। अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण करेंगे और 36 घंटे का कठिन व्रत समाप्त होगा। यह क्षण पूरे परिवार के लिए खुशी, संतोष और नई आशाओं का प्रतीक बनकर आता है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। किसी भी अनुष्ठान को करने से पहले अपने स्थानीय पंडित या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इस जानकारी की सटीकता या पूर्णता की पुष्टि News26 नहीं करता है।