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  • 2026-03-22

Dhalbhumgarh Airport: धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना पर फिर मंडराए संकट के बादल, वन भूमि की एनओसी के लिए केंद्र ने मांगी जानकारी, फाइलों में फंसा कोल्हान का सपना

Dhalbhumgarh Airport: जमशेदपुर के पास धालभूमगढ़ में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्तर के एयरपोर्ट का निर्माण कार्य एक बार फिर सरकारी फाइलों और तकनीकी आपत्तियों के चक्रव्यूह में फंस गया है. केंद्र सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए वन भूमि की स्वीकृति देने से पहले राज्य सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है. उपसचिव के अनुसार, मांगी गई महत्वपूर्ण जानकारियों के समय पर उपलब्ध न होने के कारण पूरी योजना फिलहाल अधर में लटकी हुई है, जिससे कोल्हान क्षेत्र के औद्योगिक विकास की रफ्तार थमने की आशंका पैदा हो गई है.

समझौते के छह साल बाद भी कागजों पर योजना
हवाई अड्डे के विस्तार और विकास के लिए वर्ष 2019 में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और झारखंड सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम समझौता (जेवी एग्रीमेंट) हुआ था. उस समय उम्मीद जताई गई थी कि टाटा स्टील की इस औद्योगिक नगरी को जल्द ही एक बड़े एयरपोर्ट की सौगात मिलेगी. लेकिन विडंबना यह है कि आधा दशक बीत जाने के बाद भी यह प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर शुरू होने के बजाय केवल एमओयू और पत्राचार तक ही सीमित रह गया है. वन मंत्रालय की कड़ी शर्तों ने इस राह को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है.

19 बिंदुओं पर केंद्र के सवालों का नहीं मिला जवाब
भारत सरकार के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अगस्त 2024 में वन भूमि के उपयोग को लेकर 19 गंभीर सवाल उठाए थे. इन बिंदुओं में पर्यावरणीय प्रभाव और पुनर्वनीकरण जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं. राज्य के वन विभाग ने जमशेदपुर के संबंधित प्रयोक्ता अभिकरण को कई बार स्मरण पत्र भेजे हैं, लेकिन फरवरी 2025 तक भी इन सवालों के तकनीकी जवाब नहीं मिल पाए हैं. जवाबदेही के इस अभाव के कारण राज्य सरकार केंद्र को अंतिम रिपोर्ट भेजने में असमर्थ है और मामला ठंडे बस्ते में चला गया है.

औद्योगिक और आर्थिक प्रगति पर पड़ रहा असर
झारखंड वन विभाग के उपसचिव चंद्रशेखर प्रसाद ने इस बात को स्वीकार किया है कि धालभूमगढ़ एयरपोर्ट कोल्हान के आर्थिक भविष्य के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हो सकता है. हवाई संपर्क बेहतर होने से जमशेदपुर के लौह-इस्पात उद्योग और स्थानीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है. हालांकि, मौजूदा प्रशासनिक सुस्ती और जानकारी जुटाने में हो रही देरी ने इस बड़े प्रोजेक्ट के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है. अब देखना यह है कि राज्य सरकार कब तक इन बाधाओं को दूर कर केंद्र से हरी झंडी प्राप्त कर पाती है.
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