Jharkhand News: पश्चिम एशिया के होर्मुज स्ट्रेट में पिछले कई दिनों से फंसे एक निजी कंपनी के मालवाहक जहाज पर तैनात भारतीय कैप्टन राकेश रंजन का हृदय गति रुकने (Heart Attack) से आकस्मिक निधन हो गया है. रांची के रहने वाले कैप्टन राकेश के परिजनों ने केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की मार्मिक अपील की है. 18 मार्च को हुई इस दुखद घटना के बाद से रांची स्थित उनके आवास पर मातम पसरा हुआ है. इसके साथ ही परिवार मृतक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की भी मांग कर रहा है.
कुर्सी से गिरकर हुए बेहोश, पोर्ट राशिद में घोषित हुए मृत
परिजनों के अनुसार राकेश रंजन बीती 2 फरवरी को प्राइवेट कंपनी के जहाज "एएसपी अवाना" (RPSL MUM 172) पर बतौर कैप्टन सवार हुए थे. उनके बड़े भाई उमेश सिंह ने बताया कि कंपनी से मिली सूचना के मुताबिक 18 मार्च को राकेश ड्यूटी के दौरान अचानक अपनी कुर्सी से गिरकर बेहोश हो गए थे. हालांकि उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता देने का प्रयास किया गया, लेकिन "एयरलिफ्ट करने की अनुमति" न होने के कारण उन्हें दुबई के पोर्ट राशिद ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. फिलहाल उनका शव पुलिस की निगरानी में पोर्ट राशिद के मुर्दाघर में रखा गया है.
मुख्यमंत्री और सांसद संजय सेठ को लिखा पत्र
मृतक कैप्टन के भाई ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और रांची के सांसद संजय सेठ को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है. उन्होंने मांग की है कि "दुबई स्थित भारतीय दूतावास और कंपनी के समन्वय से भाई का शव जल्द से जल्द हमें सौंपा जाए." साथ ही परिवार ने कंपनी से उनके बकाया वेतन और अन्य लाभों को बिना किसी रुकावट के जारी करने की अपील की है. राकेश रंजन मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले थे, लेकिन पिछले 20 वर्षों से सपरिवार रांची में ही बस गए थे.
ईद की छुट्टियों के कारण प्रक्रिया में देरी
बुधवार को जहाज कंपनी के कुछ प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने रांची पहुंचे थे. उन्होंने परिवार को सांत्वना देते हुए भरोसा दिलाया है कि "शव को सौंपने की कानूनी और कूटनीतिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है." हालांकि उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में ईद की तीन दिनों की आधिकारिक छुट्टी होने के कारण कागजी कार्रवाई में थोड़ी देरी हो रही है. परिवार अब इस चिंता में है कि लंबी देरी के कारण उनकी मानसिक और भावनात्मक पीड़ा बढ़ती जा रही है.