Jharkhand News: राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्धारित समय सीमा के बावजूद अपनी संपत्ति का विवरण सरकार को नहीं सौंपा है. नियम के अनुसार सभी अखिल भारतीय सेवा (All India Services) के अधिकारियों को हर साल 31 जनवरी तक अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य होता है, लेकिन इसके बावजूद राज्य के चार आईएएस, छह आईपीएस और आठ आईएफएस अधिकारियों ने अब तक यह जानकारी जमा नहीं की है.
चार आईएएस अधिकारियों ने नहीं दिया विवरण
जानकारी के अनुसार जिन चार आईएएस अधिकारियों ने अभी तक अपनी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है, उनमें विनय चौबे, संजय कुमार, मनोहर मरांडी और कृष्ण कुमार सिंह शामिल हैं. इनमें से विनय चौबे फिलहाल निलंबित चल रहे हैं. नियमों के मुताबिक हर अधिकारी को अपनी चल और अचल संपत्ति की पूरी जानकारी निर्धारित समय के भीतर सरकार को देना जरूरी होता है.
छह आईपीएस और आठ आईएफएस अधिकारी भी सूची में
इसी तरह छह आईपीएस अधिकारियों ने भी अब तक संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया है. इनमें मणि लाल मंडल, सरोजिनी लकड़ा, शुभम मीणा और विपिन दूबे प्रमुख रूप से शामिल हैं.
वहीं भारतीय वन सेवा के आठ अधिकारियों ने भी अपनी संपत्ति की जानकारी नहीं दी है. इन अधिकारियों में शैलेंद्र सिंह, सिद्धार्थ त्रिपाठी, सबा आलम अंसारी, वोधू प्रवेणा, कुमार आशीष, प्रेरणा दीक्षित, आलोक वर्मा और नरेंद्र कुमार के नाम शामिल हैं.
समय सीमा पार होने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान
केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए इस संबंध में कड़े निर्देश जारी कर रखे हैं. अगर कोई अधिकारी तय समय सीमा यानी 31 जनवरी तक अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा जमा नहीं करता है, तो उसे कई प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
नियमों के तहत ये हो सकती हैं कार्रवाई
• पदोन्नति में बाधा: आईएएस (वेतन) नियमावली 2016 के अनुसार समय पर विवरण नहीं देने वाले अधिकारी को अगले वेतन मैट्रिक्स स्तर पर प्रमोशन मिलने में देरी हो सकती है.
• केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रोक: ऐसे अधिकारियों को केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति का मौका नहीं मिल पाता है.
• विभागीय जांच: इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है.
• सतर्कता मंजूरी नहीं: महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए आवश्यक सतर्कता मंजूरी नहीं मिल सकती है.
• सेवा रिकॉर्ड में नकारात्मक टिप्पणी: इस तरह की लापरवाही को सेवा रिकॉर्ड में दर्ज किया जा सकता है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों को समय-समय पर संपत्ति का विवरण जमा करने के लिए निर्देश दिए जाते हैं ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे. हालांकि इसके बावजूद कई अधिकारियों द्वारा अब तक जानकारी जमा नहीं करना प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.