AG Report Jharkhand: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन के पटल पर महालेखा परीक्षक (AG) की रिपोर्ट पेश की. इस रिपोर्ट ने झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड (JSBCCL) की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, निगम ने 14,020.46 करोड़ रूपए की लागत से 1,328 परियोजनाएं शुरू की थीं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से केवल 55 प्रतिशत काम ही पूरे हो पाए हैं.
बिना तैयारी और बजट के शुरू हुईं योजनाएं
एजी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि निगम ने वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच कोई कॉर्पोरेट बजट तैयार नहीं किया. सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की समीक्षा और तकनीकी निगरानी के लिए कोई कमेटी भी नहीं बनाई गई. वास्तविक स्थल की स्थिति जाने बिना ही सलाहकारों के “मॉडल अनुमान” पर काम शुरू कर दिया गया, जिसके कारण 102.87 करोड़ के 35 कार्य अधूरे रह गए और 112 योजनाओं को भूमि विवाद या अन्य बाधाओं के चलते बंद करना पड़ा.
गलत नियोजन से डूबे जनता के करोड़ों रुपए
रिपोर्ट में फिजूलखर्ची के चौंकाने वाले उदाहरण दिए गए हैं. हाई टेंशन बिजली लाइन के पास एक डिग्री कॉलेज का भवन बना दिया गया, जो सुरक्षा मानकों के कारण अब उपयोग के लायक नहीं है और इस पर खर्च हुए 12 करोड़ बेकार चले गए. इसी तरह, डांडा, बिष्णुपुरा और संगमा में झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों (JBAV) के निर्माण में 8.40 करोड़ का व्यय निष्फल रहा क्योंकि संवेदकों ने बीच में ही काम रोक दिया या ढांचे अधूरे रह गए.
वित्तीय गड़बड़ी और फंड वापस न करने का आरोप
निगम पर वित्तीय अनुशासनहीनता का भी आरोप लगा है. रिपोर्ट के अनुसार, निगम ने उपयोगकर्ता विभागों से प्राप्त 60.95 करोड़ की वह राशि वापस नहीं की, जो 24 कार्यों के निष्पादन के लिए दी गई थी. इसके अलावा, विभागों द्वारा भूमि सौंपने में देरी और सार्वजनिक बाधाओं के कारण कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स अधर में लटके हुए हैं. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब भ्रष्टाचार और तकनीकी विफलता को लेकर सदन में सियासी पारा चढ़ गया है.