Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य की वित्तीय स्थिति का ब्यौरा पेश किया. उन्होंने केंद्र सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारी आर्थिक चुनौतियों के बावजूद राज्य अपने संसाधनों से बेहतर राजस्व जुटा रहा है.
वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य सरकार को अपने करों से अब तक 81 फीसदी राजस्व प्राप्त हो चुका है. उन्होंने भरोसा जताया कि वित्तीय वर्ष के शेष 15 दिनों में यह आंकड़ा 90 से 95 फीसदी तक पहुंच जाएगा. गैर-कर राजस्व के मामले में भी राज्य ने 78 फीसदी की प्राप्ति कर ली है.
वित्त मंत्री ने आंकड़ों के जरिए केंद्र सरकार पर फंड रोकने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि केंद्र की बेरुखी से राज्य को भारी वित्तीय घाटा हो रहा है. झारखंड को जीएसटी से 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के 5,161 करोड़ रुपये अब तक नहीं मिले हैं. इसके अलावा, अनुदान के रूप में 8,558 करोड़ रुपये की राशि भी बकाया है. कुल मिलाकर केंद्र सरकार ने अब तक राज्य के हक का 13,000 करोड़ रुपये जारी नहीं किया है.
ऊर्जा और पर्यटन विभाग के 160 करोड़ रुपये के गबन मामले पर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने बताया कि केनरा बैंक और सेंट्रल बैंक में जमा इस राशि में से केनरा बैंक 45 करोड़ रुपये वापस करने पर सहमत हो गया है. सरकार ने निर्देश दिया है कि जब तक पूरी राशि वापस नहीं मिलती, तब तक इन बैंकों की शाखाओं में सरकारी पैसा जमा नहीं किया जाएगा.
सदन में चर्चा के दौरान 10 हजार करोड़ रुपये की अनियमितता का मुद्दा भी उठा. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह गड़बड़ी 2001 से 2022 के बीच यानी भाजपा के शासनकाल के दौरान हुई है. पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव की समीक्षा में यह मामला सामने आया था, जिसकी अब गहन जांच कर सरकार इस राशि का पता लगाएगी.
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक बजट की 70 फीसदी राशि खर्च की जा चुकी है. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से अपील की कि वे केंद्र के पास बकाया 1 लाख 36 हजार करोड़ रुपये की बड़ी राशि राज्य को दिलाने में सहयोग करें. यदि केंद्र से बकाया 13 हजार करोड़ मिल जाते हैं, तो बजट खर्च का आंकड़ा 90 फीसदी तक पहुंच जाएगा.