बालिकाओं के आवासीय विद्यालयों को अपग्रेड करने की मांग
सदन में बोलते हुए विधायक ने अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए संचालित आवासीय विद्यालयों की स्थिति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के कई ऐसे विद्यालय हैं जो पिछले कई वर्षों से केवल मध्य विद्यालय स्तर तक ही सीमित हैं। उनके अनुसार यदि इन स्कूलों को 10+2 स्तर तक विकसित किया जाए तो छात्राओं को आगे की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और उनकी शिक्षा बाधित नहीं होगी। उन्होंने सरकार से इन विद्यालयों के विस्तार की दिशा में पहल करने की अपील की।
छात्रावासों की जर्जर स्थिति पर जताई चिंता
जनार्दन पासवान ने अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक छात्रों के लिए बने छात्रावासों की खराब हालत का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई छात्रावास काफी पुराने हो चुके हैं और उनकी हालत जर्जर हो गई है। कई जगहों पर भवनों की छत से पानी टपकने की समस्या है और रहने-सहने के साथ-साथ शौचालय की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने सरकार से इन भवनों की मरम्मत और सुधार के लिए जल्द कदम उठाने की मांग की।
आंगनबाड़ी व्यवस्था में संसाधनों की कमी का मुद्दा
विधायक ने आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक ढांचे में कमी की ओर भी सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई जिलों में अधिकारियों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे योजनाओं के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनके जिले में 17 सीडीपीओ पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो अधिकारी ही कार्यरत हैं। इसके अलावा निरीक्षण के लिए वाहनों की कमी के कारण एक अधिकारी को कई प्रखंडों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील
सदन में अपनी बात समाप्त करते हुए जनार्दन पासवान ने सरकार से आग्रह किया कि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ी इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के समग्र विकास के लिए योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और आधारभूत सुविधाओं में सुधार बेहद जरूरी है।