Delhi: संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। पश्चिम एशिया मिडल ईस्ट में गहराते तनाव और युद्ध की स्थिति पर विदेश मंत्री के बयान के बाद विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक "बड़ा झटका" करार दिया है।
राहुल गांधी का बड़ा आरोप, देश को लगने वाला है झटका
सदन के बाहर और भीतर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के बीच हुए समझौतों को कटघरे में खड़ा किया। राहुल गांधी ने कहा, पश्चिम एशिया का संकट कोई छोटी घटना नहीं है, यह एक बड़े बदलाव की लड़ाई है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होने वाला है। शेयर बाजार की अस्थिरता इसका ट्रेलर है। प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ कुछ ऐसे समझौते किए हैं, जिनका खामियाजा देश को भुगतना पड़ेगा। आखिर सरकार इस पर चर्चा करने से डर क्यों रही है।
राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इस संकट के आर्थिक प्रभावों पर ठोस रणनीति नहीं बनाई गई, तो भारत के मध्यम वर्ग और निवेशकों को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी।
मल्लिकार्जुन खरगे, ऊर्जा सुरक्षा खतरे में
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी मोर्चा संभालते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर रही है। भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए एक बड़े हिस्से के तौर पर इस क्षेत्र पर निर्भर है। खरगे ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने से भारत में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे आम आदमी की थाली पर असर पड़ेगा।
विपक्ष की मांग है कि सरकार केवल बयानबाजी न करे, बल्कि यह स्पष्ट करे कि इस युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए उसके पास क्या प्लान बी है। फिलहाल, संसद में इस मुद्दे पर गतिरोध बरकरार है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है।