Jamshedpur Breaking: जमशेदपुर में सोमवार को टाटा स्टील के जनरल ऑफिस गेट के सामने उस समय भारी तनाव और गहमागहमी का माहौल बन गया, जब जेएलकेएम (JLKM) नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में सैकड़ों लोग धरने पर बैठ गए। यह पूरा मामला टाटा स्टील के एक वेंडर कर्मचारी की कार्यस्थल पर हुई दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान हुई मौत और उसके उचित मुआवजे से जुड़ा है।
क्या है पूरा मामला?
रॉबिन महतो नामक मजदूर, जो मूल रूप से सिल्ली के निवासी थे। वे पिछले लगभग 20 वर्षों से टाटा स्टील के वेंडर एलएंडटी (L&T) कंपनी के तहत एक कुशल मजदूर के रूप में कार्यरत थे। परिजनों के अनुसार, बीती 20 जनवरी को ड्यूटी के दौरान रॉबिन महतो एक गंभीर हादसे का शिकार हो गए थे। लंबे समय तक अस्पताल में मौत से जूझने के बाद, अंततः 8 मार्च को उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुआवजे की मांग और प्रबंधन पर आरोप
मजदूर की मौत के बाद परिजनों और जेएलकेएम समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। धरने पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो ने आरोप लगाया कि रॉबिन महतो की मौत के बाद प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है। उनका कहना है कि 20 जनवरी को हुए हादसे के बाद से ही कंपनी परिवार को केवल आश्वासन देकर गुमराह करती रही और अब तक मुआवजे के संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
गेट पर डटे परिजन, न्याय की गुहार
टाटा स्टील के जनरल ऑफिस गेट के सामने चल रहे इस प्रदर्शन में मृतक की पत्नी और उनके तीनों बेटे भी शामिल हैं। परिजनों ने स्पष्ट किया है कि रॉबिन महतो घर के इकलौते कमाऊ सदस्य थे और उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रबंधन सम्मानजनक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने जैसे न्यायोचित फैसले नहीं लेता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
खबर लिखे जाने तक, जमशेदपुर के इस व्यस्त इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और पुलिस बल की तैनाती है। हालांकि, जेएलकेएम नेता और समर्थक अपनी मांगों को लेकर गेट पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने टाटा स्टील प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।