Jharkhand News: लातेहार जिले के मनिका प्रखंड के चार गांवों में आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए फिर से समय मांगे जाने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार के पास जवाब देने का यह अंतिम अवसर है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दायर किया जाए.
तीन महीने बाद भी जवाब नहीं मिलने पर सवाल
गौरतलब है कि इस मामले में सितंबर माह में ही सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया था. तीन महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस रहने पर अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सरकार को अधिक गंभीर होना चाहिए और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों (रिमोट एरिया) का विकास उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए.
चार गांवों के बच्चों के भविष्य का सवाल
याचिकाकर्ता शीला देवी व अन्य की ओर से अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने अदालत को बताया कि मनिका प्रखंड के ओपे और दुंबी सहित चार गांवों में बच्चों की संख्या काफी अधिक है. इसके बावजूद वहां एक भी आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है, जिससे बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर बुरा असर पड़ रहा है. अधिवक्ता ने दलील दी कि बच्चों के समुचित मानसिक और शारीरिक विकास के लिए इन गांवों में तुरंत आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित करना अनिवार्य है.