Jharkhand News: हजारीबाग के पूर्व डीसी और आईएएस अधिकारी विनय चौबे ने झारखंड हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने उनकी याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत अब यह तय करेगी कि क्या इस मामले में चौबे को जेल से रिहा किया जा सकता है या नहीं.
हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी जमानत अर्जी
इससे पहले, 6 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने विनय चौबे की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट का मानना था कि उन पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री में उनकी भूमिका की गहराई से जांच जरूरी है. हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद ही आईएएस अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर अब 23 मार्च को अगली सुनवाई होगी.
सेवायत भूमि विवाद और एसीबी की कार्रवाई
यह पूरा मामला हजारीबाग में सेवायत भूमि की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़ा है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पिछले साल अगस्त में इस संबंध में कांड संख्या 9/2025 दर्ज की थी. जांच एजेंसी का आरोप है कि डीसी के पद पर रहते हुए विनय चौबे ने नियमों की अनदेखी कर जमीन के अवैध हस्तांतरण में मदद की. इस मामले में एसीबी पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.