Jamshedpur: ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने सात समंदर पार झारखंड के स्टील सिटी जमशेदपुर की रातों की नींद उड़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छिड़ी इस जुबानी और जमीनी जंग का सबसे गहरा असर उन परिवारों पर दिख रहा है, जिनके लाडले अपनी किस्मत संवारने के लिए खाड़ी देशों में पसीना बहा रहे हैं।
खबरों के साथ थमी सांसें, पल-पल की अपडेट ले रहे परिजन
जमशेदपुर के मानगो, साकची, और टेल्को बारीडीह जैसे इलाकों से सैकड़ों युवा दुबई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में कार्यरत हैं। सोनारी के रहने वाले दिलीप दास का परिवार इन दिनों गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहा है। उनका बेटा प्रतीक दास पिछले पांच वर्षों से दुबई में नौकरी कर रहा है।
दिलीप दास बताते हैं, जब से टीवी पर मिसाइल हमलों और सैन्य हलचल की खबरें आनी शुरू हुई हैं, घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। प्रतीक भले ही कहता है कि वहां सब ठीक है, लेकिन सोशल मीडिया की खबरें दिल बैठा देती हैं। दिलीप दास का परिवार अब हर एक घंटे में फोन कर प्रतीक का हालचाल ले रहा है।
खाड़ी देशों में साइलेंट पैनिक
हालांकि, वर्तमान में दुबई और अन्य पड़ोसी देशों में नागरिक जीवन सामान्य है, लेकिन ईरान और इज़रायल के बीच सीधी भिड़ंत की आशंका ने एक अदृश्य डर पैदा कर दिया है। जमशेदपुर के कई अन्य परिवार भी इसी तरह की चिंता में डूबे हैं। उन्हें डर है कि यदि संघर्ष और बढ़ा, तो हवाई सेवाएं बाधित हो सकती हैं या सुरक्षित वापसी की राह मुश्किल हो जाएगी।
धैर्य और संयम की आवश्यकता
इस कठिन समय में उन सभी परिवारों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातें, अफवाहों से बचें, सोशल मीडिया पर चल रहे पुराने वीडियो या भ्रामक खबरों पर तुरंत विश्वास न करें। आधिकारिक समाचार स्रोतों पर ही भरोसा करें। दूतावास के संपर्क में रहें, खाड़ी देशों में रह रहे परिजनों को सलाह दें कि वे भारतीय दूतावास के दिशा-निर्देशों पर नजर रखें। अपनों से जुड़े रहें, लेकिन घबराहट न फैलाएं। आपका संयम विदेश में रह रहे व्यक्ति का मनोबल बढ़ाएगा। युद्ध की विभीषिका केवल सीमाओं पर नहीं होती, वह उन आंखों में भी होती है जो दूर देश में बैठे अपने बेटे की सलामती का इंतज़ार कर रही हैं।