Railway News: दक्षिण पूर्व रेलवे के टाटानगर स्टेशन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले दिन काफी मुश्किल भरे होने वाले हैं. नागपुर रेल मंडल में लाइन मरम्मत और विकास कार्यों के चलते टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस समेत कई प्रमुख ट्रेनों को लंबे समय के लिए रद्द करने का निर्णय लिया गया है. रेलवे ने इन ट्रेनों की स्लीपर क्लास बुकिंग भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दी है, जिससे ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जाने वाले हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ना तय है.
इतवारी और मुंबई रूट की ट्रेनें 22 दिनों तक प्रभावित
रेलवे द्वारा जारी आदेश के अनुसार, गाड़ी संख्या 18109/18110 टाटानगर-इतवारी एक्सप्रेस 3 मई से 24 मई तक अप और डाउन दोनों दिशाओं में पूरी तरह रद्द रहेगी. इसके अलावा, नागपुर ब्लॉक के कारण मुंबई रूट की अन्य ट्रेनें भी प्रभावित होंगी:
- शालीमार-मुंबई कुर्ला एक्सप्रेस: 4 से 26 अप्रैल के बीच कुल 12 दिनों के लिए रद्द.
- शालीमार-मुंबई ज्ञानेश्वरी एक्सप्रेस: 4 से 24 अप्रैल के बीच कुल 12 दिनों के लिए रद्द.
- इतवारी एक्सप्रेस: इस अवधि के दौरान कुल 20 फेरे रद्द रहेंगे, जिससे चार राज्यों के यात्रियों को आवागमन में भारी कठिनाई होगी.
टाटा की तीनों “वंदे भारत” भी हुई लेट, यात्रियों का हंगामा
सिर्फ रद्दीकरण ही नहीं, बल्कि ट्रेनों की लेटलतीफी ने भी यात्रियों का कचूमर निकाल दिया है. रविवार को टाटानगर से चलने वाली तीनों वंदे भारत ट्रेनें (बरहमपुर, राउरकेला और रांची) एक से डेढ़ घंटे की देरी से चलीं. हालात इतने खराब थे कि चक्रधरपुर से टाटानगर तक की महज 62 किमी की दूरी तय करने में ट्रेनों को 6 घंटे तक का समय लग गया. बड़ाबाम्बो, सीनी और गम्हरिया जैसे छोटे स्टेशनों पर बेवजह रुकने के कारण यात्रियों का धैर्य जवाब दे गया और ट्रेनों में हंगामे जैसी स्थिति बन गई.
चक्रधरपुर मंडल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ट्रेनों के घंटों लेट होने के कारण दर्जनों यात्रियों ने सोशल मीडिया पर रेलवे से शिकायत की है. उदयपुर-शालीमार एक्सप्रेस को चक्रधरपुर से टाटा पहुंचने में 5 घंटे से अधिक का समय लगा, जबकि चक्रधरपुर पैसेंजर को गम्हरिया से टाटानगर आने में ही 4 घंटे लग गए. लेटलतीफी से तंग आकर कई यात्री गम्हरिया और कांड्रा स्टेशनों पर ही ट्रेन छोड़कर निजी वाहनों से जमशेदपुर पहुंचे. गीतांजलि, अहमदाबाद और आसनसोल जैसी एक्सप्रेस ट्रेनें भी इस अव्यवस्था की शिकार रहीं, जिससे रेल प्रशासन की समयबद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.