Seraikela News: आपने फिल्मों में कारों का कायाकल्प होते तो बहुत देखा होगा, लेकिन झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में कुछ युवाओं ने इसे हकीकत में बदल दिया है. चांडिल स्थित “टार्जन गैरेज” के छह मैकेनिकों ने अपनी दो साल की कड़ी मेहनत और तकनीकी सूझबूझ से एक पुरानी मारुति 800 को चमचमाती “लेम्बोर्गिनी” का रूप दे दिया है. इस शानदार “देसी लेम्बोर्गिनी” की चर्चा अब केवल जिले या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए इसकी कलाकारी पूरे देश में सुर्खियां बटोर रही है.
2 साल की मेहनत और 5 लाख का निवेश
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने वाले मैकेनिकों के पास न तो कोई बड़ी इंजीनियरिंग डिग्री है और न ही आधुनिक संसाधन. टीम ने मिलकर करीब 5 लाख रुपये का फंड जुटाया और पुरानी मारुति के इंजन व चेसिस को एक लग्जरी स्पोर्ट्स कार के लुक में ढाल दिया. इसकी फिनिशिंग इतनी सटीक है कि पहली नजर में यह पहचान पाना मुश्किल है कि इसके भीतर मारुति 800 का दिल धड़क रहा है.
किराए पर मिलेगी यह कार
गैरेज के मैकेनिकों ने बताया कि यह कार केवल प्रदर्शन के लिए नहीं है. इसे व्यावसायिक रूप से भी इस्तेमाल किया जाएगा. अब यह “देसी लेम्बोर्गिनी” भाड़े (किराये) पर उपलब्ध है, जिसे लोग विशेष आयोजनों के लिए बुक कर सकते हैं. इसकी बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए टीम ने नए ऑर्डर लेने भी शुरू कर दिए हैं.
अब 4 महीने में तैयार होगी ऐसी ही कस्टमाइज कार
अगर आप भी अपनी पुरानी कार को इसी तरह का मॉडर्न लुक देना चाहते हैं, तो “टार्जन गैरेज” की टीम ने इसके लिए समय सीमा भी तय कर दी है. मैकेनिकों का कहना है कि पहला मॉडल तैयार करने में भले ही दो साल लगे, लेकिन अब उनके पास पूरा खाका तैयार है. अब वे किसी भी गाड़ी को कस्टमाइज या मॉडिफाई करने का काम मात्र 4 महीने के भीतर पूरा कर देंगे.
झारखंड के इन युवाओं की यह उपलब्धि न केवल उनकी आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर हुनर और जज्बा हो, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती.