Interim Supreme Leader: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद उपजे नेतृत्व संकट के बीच देश की कमान अब एक अंतरिम परिषद के हाथों में सौंप दी गई है. मिडिया रिपोर्ट्स मुताबिक, वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफ़ी को देश का अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है. अराफी उस अस्थायी नेतृत्व परिषद का नेतृत्व करेंगे, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान और मुख्य न्यायाधीश घोलम-होसैन मोहसेनी-एजेई शामिल हैं. यह परिषद नए सर्वोच्च नेता के औपचारिक चयन तक देश के तमाम महत्वपूर्ण राजनीतिक और धार्मिक फैसलों की जिम्मेदारी संभालेगी. गौरतलब है कि शनिवार को हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली हमलों में न केवल खामेनेई बल्कि देश के कई शीर्ष सैन्य ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.
धार्मिक विद्वान अलीरेज़ा अराफी का सफर और विचारधारा
वर्ष 1959 में यज़्द शहर में जन्मे अलीरेज़ा अराफी ईरान के सबसे प्रभावशाली और अनुभवी धर्मगुरुओं में से एक माने जाते हैं. वह अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं और वर्तमान में क़ोम शहर के प्रमुख इमाम हैं. अराफी का राजनीतिक कद 2019 में तब और बढ़ा जब वे शक्तिशाली गार्जियन काउंसिल के सदस्य बने. उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे पारंपरिक धार्मिक मूल्यों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर देते हैं. अराफी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों के इस्तेमाल के पक्षधर हैं ताकि इस्लामी सभ्यता को आधुनिक युग के साथ जोड़ा जा सके.
सैन्य मोर्चे पर फेरबदल और अहमद वहीदी की नियुक्ति
युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान ने अपनी सबसे ताकतवर सैन्य शाखा, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव किया है. शनिवार के हमलों में IRGC प्रमुख जनरल मोहम्मद पकपूर की मौत के बाद अहमद वहीदी को नया सैन्य चीफ नियुक्त किया गया है. वहीदी अब इस चुनौतीपूर्ण समय में ईरान की सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई की रणनीति तैयार करेंगे. देश के भीतर अयातुल्ला की उपाधि धारण करने वाले अराफी का अंतरिम पद पर आना यह संकेत देता है कि ईरान संक्रमण काल के दौरान स्थिरता और अनुभव को प्राथमिकता दे रहा है.