Jharkhand: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कोडरमा की विधायक नीरा यादव ने राज्य में विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि कागजों पर योजनाएं भले ही सफल दिखाई दें, लेकिन जमीन पर उसका असर नजर नहीं आता।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि दीमक भी लगातार मेहनत करती है, लेकिन उसका परिणाम विनाश होता है। उसी तरह यदि योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं होगा, तो जनता को लाभ नहीं मिल पाएगा। उनका कहना था कि जब तक राज्य में बुनियादी ढांचा मजबूत नहीं होगा, तब तक आम लोगों का जीवन स्तर सुधरना मुश्किल है।
केंद्र से लंबित राशि पर सरकार को घेरा
नीरा यादव ने केंद्र से मिलने वाली राशि के मुद्दे पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 47 हजार से अधिक उपयोगिता प्रमाण पत्र केंद्र को नहीं भेजे गए हैं, जिसके कारण बड़ी राशि अटकी हुई है। उन्होंने वित्त मंत्री से विभागवार लंबित राशि का स्पष्ट ब्यौरा सदन में प्रस्तुत करने की मांग की।
साथ ही सुझाव दिया कि राज्य के सभी विधायक और सांसद एकजुट होकर संयुक्त बैठक करें और केंद्र से राज्य का हक दिलाने की दिशा में पहल करें।
अबुआ आवास योजना की प्रगति पर सवाल
अबुआ आवास योजना को लेकर भी विधायक ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में 6.5 लाख आवास बनाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन अब तक केवल 18,849 घर ही पूरे हो सके हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि कई गरीब परिवारों के मकान अधूरे पड़े हैं और कुछ तो गिरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। पाकुड़ और दुमका जिले के जरमुंडी क्षेत्र में जियो टैगिंग में गड़बड़ी और किस्तों के भुगतान में देरी के आरोप भी उन्होंने लगाए।
विधानसभा समिति को गलत जानकारी देने का आरोप
विधायक ने यह भी कहा कि 10 जनवरी 2026 को विधानसभा समिति को बताया गया था कि कोडरमा की एक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि वह सड़क दिसंबर 2025 में ही बिना शिलान्यास के बन चुकी थी। उन्होंने इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की।
मनरेगा के नाम को लेकर टिप्पणी
मनरेगा के नाम को लेकर चल रही बहस पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राम नाम से परहेज क्यों किया जा रहा है। उनका कहना था कि गांधी जी की समाधि पर भी "हे राम" लिखा है, ऐसे में राम का नाम लेने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
DMFT फंड के उपयोग पर उठाए सवाल
डीएमएफटी फंड के उपयोग को लेकर भी विधायक ने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि खनन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय अधिकतर राशि शहरी इलाकों में खर्च की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोडरमा में इंजीनियरिंग कोचिंग के नाम पर एक निजी कंपनी को 1 करोड़ 88 लाख रुपये दिए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
इसके अलावा स्कूलों में थाली और ग्लास खरीद के लिए 78 लाख रुपये खर्च किए जाने पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए।
वन भूमि और बाहरी लोगों के बसने का मुद्दा
नीरा यादव ने कोडरमा जिले के चंदवारा, डोमचांच और सतगावां प्रखंड के जंगलों में बाहरी लोगों को बसाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के आधार और वोटर कार्ड बनाए जा रहे हैं और उन्हें वन भूमि पट्टा दिया जा रहा है।
उनका कहना था कि इससे स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए।
विधानसभा में उठाए गए इन मुद्दों ने राज्य की विकास योजनाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है।