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  • 2026-02-26

Jharkhand Budget Session: बजट आंकड़ों का मायाजाल और बदहाल किसान, नवीन जायसवाल ने बजट के खर्च पर उठाए गंभीर सवाल

Jharkhand Budget Session: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के कृषि एवं संबद्ध प्रक्षेत्र के बजट प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने राज्य के 1,58,560 करोड़ रुपये के कुल बजट को आंकड़ों का खेल बताते हुए कहा कि सरकार केवल कागजों पर बड़ी राशि दिखाकर विकास का भ्रम पैदा कर रही है, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है. विधायक ने तंज कसते हुए कहा कि जब विभाग आवंटित राशि को खर्च ही नहीं कर पा रहा है, तो बजट के आकार को बढ़ाकर दिखाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता.

संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद काम नहीं हो रहा
कृषि विभाग के पिछले प्रदर्शन का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग के पास 1055 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से केवल 362 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके और लगभग 500 करोड़ रुपये की भारी राशि वापस (सरेंडर) कर दी गई. वर्तमान वित्तीय वर्ष की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि, पशुपालन और सहकारिता विभाग के लिए आवंटित 4000 करोड़ रुपये में से 31 जनवरी 2025 तक मात्र 36 प्रतिशत यानी 1443 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं. उन्होंने सरकार से पूछा कि यदि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद काम नहीं हो रहा है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है.

सरकारी तंत्र की विफलता के कारण किसान अपना धान बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर
नवीन जायसवाल ने चुनावी वादों और किसानों की दुर्दशा को लेकर भी सरकार को घेरा. उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव के समय किसानों से 3200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया गया था, जिसे बाद में घटाकर 2400 रुपये करने की बात कही गई, लेकिन हकीकत में किसानों को यह न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नसीब नहीं हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी तंत्र की विफलता के कारण किसान अपना धान 1500 से 1600 रुपये के औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर हैं.

मिलों की टैगिंग और भंडारण की समस्या का समाधान नहीं किया गया
धान खरीद की सुस्त प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए विधायक ने कहा कि राज्य में 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य तो रखा गया है, लेकिन मिल टैगिंग में देरी और गोदामों के भरे होने के कारण खरीद की रफ्तार बेहद धीमी है. उन्होंने नगरी प्रखंड का विशिष्ट उदाहरण देते हुए सदन को बताया कि वहां 8000 क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 15 फरवरी 2026 तक महज 1700 क्विंटल धान की ही खरीद संभव हो सकी है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही मिलों की टैगिंग और भंडारण की समस्या का समाधान नहीं किया, तो किसानों की मेहनत का अनाज खेतों में ही सड़ जाएगा.
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