Jharkhand Vidhansabha: झारखंड विधानसभा में सरयू राय के सवाल को प्रमुखता से उठाते हुए विधायक राज सिन्हा ने सिकिदिरी जल विद्युत परियोजना में हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं पर सरकार को घेरा. उन्होंने सदन में आश्चर्य व्यक्त किया कि जिस कार्य का मूल प्राक्कलन मात्र 4.88 करोड़ रुपये था, उस मामले में अदालत द्वारा 130 करोड़ रुपये के भुगतान का आदेश राज्य की वित्तीय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है.
अल्प प्राक्कलन और कार्य आदेश में भारी अंतर
यह मामला वर्ष 2012 में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) द्वारा सिकिदिरी परियोजना की दो इकाइयों की मरम्मत से संबंधित है. जहां प्रोजेक्ट मैनेजर ने मरम्मत के लिए 4.88 करोड़ रुपये का प्राक्कलन (Estimate) तैयार किया था, वहीं तत्कालीन मुख्य अभियंता ने इसे बढ़ाकर 20.87 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया. भुगतान में हुए इसी विवाद ने कानूनी रूप ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप कमर्शियल कोर्ट ने ब्याज सहित 130 करोड़ रुपये चुकाने का निर्देश दिया है.
कानूनी पेच और कुर्की की नौबत
झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड (JUUNL) ने इस आदेश को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली. फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन के अधीन है. दूसरी तरफ, भेल(भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स) ने भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कमर्शियल कोर्ट में संपत्ति कुर्की का आवेदन दिया है, जिस पर 17 मार्च 2026 को सुनवाई होनी है. राज सिन्हा ने सवाल उठाया कि जब राज्य फंड की कमी की बात करता है, तो ऐसी लापरवाही से खजाने पर पड़ने वाले बोझ का जिम्मेदार कौन है?
सीबीआई जांच और विभागीय एक्शन
प्रभारी मंत्री योगेंद्र महतो ने सदन को बताया कि इस मामले में सीबीआई पहले ही प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है. जांच में भेल और जेयूवीएनएल के कुल सात अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई है. वित्त सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर चार पदाधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. मंत्री ने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे.